संघ हिटलर की तरह : दिग्विजय (लीड-1)

कांग्रेस महाधिवेशन में राजनीतिक प्रस्ताव पर बहस की शुरुआत करते हुए दिग्विजय ने कहा, "राष्ट्रवादी विचारधारा के नाम पर आरएसएस मुसलमानों को ठीक उसी तरह निशाना बना रही है जिस प्रकार हिटलर ने 1930 में यहूदियों को निशाना बनाने के लिए की गई कार्रवाई को राष्ट्रवाद का नाम दिया था।"

उन्होंने कहा कि आरएसएस देश की नई पीढ़ी में मुसलमानों के प्रति घृणा के बीज बो रही है और "यह हमारे लिए सबसे बड़ा खतरा है।"

दिग्विजय ने कहा कि आरएसएस के लोग नौकरशाही और न्यायपालिका से लेकर सेना तक में घुस आए हैं। "वह चाहे मालेगांव विस्फोट हो या मक्का मस्जिद का या फिर समझौता एक्सप्रेस का, इन विस्फोटों में शामिल लोग हिन्दू संगठनों के ही क्यों हैं।" यहां तक कि शिशु मंदिरों में बच्चों को हिंसा का पाठ पढ़ाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने आरएसएस कार्यकर्ता सुनील जोशी की हत्या की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग की है। "यह वही आदमी है जो कई आतंकवादी गतिविधियों में शामिल था।"

"जोशी को मैं इसलिए जानता हूं क्योंकि मैं मध्य प्रदेश से हूं। समझौता एक्सप्रेस, मालेगांव, मक्का मस्जिद और अजमेर शरीफ विस्फोट मामलों की जांच में उसका नाम आया था। ऐसा क्यों है कि इन सभी आतंकवादी कार्रवाइयों में लिप्त लोगों को सम्बंध आरएसएस से हैं। कई लोग गिरफ्तार किए गए हैं। ये सभी आएसएस के कार्यकर्ता हैं।"

जोशी हत्याकांड की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपने के लिए उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम का साधुवाद किया।

उन्होंने कहा, "ये लोग अफवाह फैलाने में बहुत ही माहिर हैं। देश की जनता को इनके झांसे में नहीं आना चाहिए। भाजपा व संघ के लोगों से डरने की भी जरूरत नहीं है। ये गीदड़ भभकी देते हैं। डंडा लेकर खड़े हो जाइए तो ये भाग जाएंगे नहीं तो ये लोग आपके सिर पर आ बैठेंगे। इसलिए इनका डटकर मुकाबला कीजिए।"

भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी पर निशाना साधते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा, "बाबरी मस्जिद विध्वंस की घटना देश के इतिहास का सबसे काला अध्याय है। आडवाणी की रथ यात्रा के कारण ही देश में आतंकवाद की जड़े मजबूत हुईं।"

दिग्विजय ने अपने सम्बोधन के दौरान भाजपा और नक्सलियों के बीच सम्बंध होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस बात की भी जांच होनी चाहिए कि आखिरकार नक्सलियों के गढ़ों में भाजपा ही क्यों जीतती है।

भ्रष्टाचार पर भाजपा पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच कराने की मांग पर विपक्षी दलों ने संसद नहीं चलने दी। जबकि इसकी कोई जरूरत ही नहीं हैं। जेपीसी जांच की मांग के पीछे साजिश की बू आती है।

उन्होंने कहा, "संसद नहीं चली तो कांग्रेस सांसदों ने वेतन और भत्ते नहीं लिए। इसके लिए वे धन्यवाद के पात्र हैं जबकि भाजपा नेताओं ने 10 मिनट की नारेबाजी के 2000-2000 रुपये लिए।"

दिग्विजय ने कहा, "भ्रष्टाचार के मुद्दे पर हाय तौबा मचाने वाली भाजपा की कर्नाटक के मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्रवाई की हिम्मत नहीं है। हिम्मत है तो कार्रवाई करे भाजपा। खामोश क्यों है वह। उन्होंने बेटे-बेटियों को जमीन की रेवड़ियां बांटीं। रेड्डी ब्रदर्स खुलेआम लूट कर रहे हैं। सुषमा स्वराज को रेड्डी बंधुओं से अपने रिश्ते साफ करने चाहिए।"

उन्होंने कहा कि देश में आज भ्रष्टाचार के इतने मामले क्यों सामने आ रहे हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि कांग्रेस अध्यक्ष ने देश की जनता को सूचना का अधिकार दिया। उसे वह ताकत दी जो इससे पहले विधायकों व सांसदों तक ही सीमित थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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