विकिलीक्स खुलासा : चीन का अगला नेता क्रांतिकारियों का क्रांतिकारी
जर्मन पत्रिका 'डेर स्पीगल' द्वारा प्रकाशित संदेशों में यह उजागर हुआ है कि झी के लिए धन महत्वहीन लगता है, क्योंकि उनके पास पहले से पर्याप्त धन है। वह अमेरिका को पसंद करते हैं और किसी समय बौद्ध धर्म के रहस्यों और एशियाई मार्शल आर्ट की ओर आकर्षित थे।
'डेर स्पीगल' ने कहा है कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति ने 18 अक्टूबर को 57 वर्षीय झी जिंपिंग को ताकतवर, केंद्रीय सैन्य आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया। इससे यह तय हो गया है कि वह 2012 में कम्युनिस्ट पार्टी के नेता और चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओ का स्थान लेंगे।
बीजिंग स्थित अमेरिकी दूतावास ने चीन के भावी नेता के बारे में उल्लेखनीय तरीके से सटीक जानकारी दी है। एक सूत्र के अनुसार झी अति महत्वाकांक्षी और अच्छे व्यक्ति हैं। उनकी परवरिश भी सुविधाओं में हुई है।
झी, पूर्व गुरिल्ला लड़ाके और बाद में उप प्रधानमंत्री रहे झी झोंगसम के बेटे हैं।
माओ जेदोंग के सांस्कृतिक क्रांति के दौरान झी के पिता आरोपी थे, लिहाजा झी को बीजिंग से बाहर भेज दिया गया था।
अमेरिकी दूतावास के सूत्रों ने कहा है कि 1970 के दशक के आरम्भिक दिनों में कई सारे युवकों को बीजिंग वापसी की अनुमति दी गई। लेकिन जिस समय उनके समक्ष कई सारे युवक अपनी नई आजादी का आनंद लेने में व्यस्त थे, झी ने 'क्रांतिकारियों का क्रांतिकारी' बनना पसंद किया।
अमेरिकी संदेशों में कहा गया है कि झी ने महसूस किया कि राजनीति में उनका भविष्य तभी बन सकता है, जब वह बीजिंग की सत्ता से फिलहाल कुछ दिनों के लिए खुद को अलग कर लेंगे और ग्रामीण इलाकों में जाकर अनुभव हासिल करेंगे।
उनका मानना था कि उनके पिता की पृष्ठभूमि पर्याप्त नहीं है और इसलिए राजधानी में उनके कई सारे शत्रु पैदा होने के खतरे अधिक थे।
उन्होंने धीरे-धीरे हीबेई, फुजियान और झेजियांग प्रांतों में अपने लिए जगह बनाई। अमेरिकी संदेशों में कहा गया है कि चूंकि फुजियान ने ताइवान के अलग होने का दंश झेला था, लिहाजा झी के पास ताइवानी लोगों की पीड़ा की समझ है।
लेकिन झी की पृष्ठभूमि और उनकी मौजूदा स्थिति के बावजूद पार्टी के वर्तमान अध्यक्ष और राष्ट्रपति, हू उन्हें अपना उत्तरवर्ती नहीं मानते।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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