आतंकवाद बहुसंख्यक का हो या अल्पसंख्यक का, खतरनाक : सोनिया (लीड-1)

नई दिल्ली, 19 दिसम्बर (आईएएनएस)। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने रविवार को कहा कि आतंकवाद जैसा भी हो, वह चाहे बहुसंख्यक का हो या फिर अल्पसंख्यक का, खतरनाक होता है। उनके मुताबिक दोनों में कोई अंतर नहीं होता है। पार्टी इसमें लिप्त संगठनों में कोई भेद नहीं करती। सोनिया ने साथ ही संसद में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के रुख और उसके द्वारा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को निशाना बनाए जाने की कड़ी आलोचना की।

दिल्ली के बुराड़ी में पार्टी के तीन दिवसीय 83वें महाधिवेशन को सम्बोधित करते हुए सोनिया ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि देश की पहचान धर्मनिरपेक्षता के प्रति गहरी व मजबूत प्रतिबद्धता वाले राष्ट्र के रूप में है और देश ने सभी प्रकार की साम्प्रदायिकता के खिलाफ संघर्ष किया है।

उन्होंने कहा, "आतंकवाद जैसा भी हो, वह चाहे बहुसंख्यक का हो या फिर अल्पसंख्यक का, खतरनाक होता है। दोनों में कोई अंतर नहीं होता है। कांग्रेस आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों और साम्प्रदायिकता में लिप्त बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक समुदाय के संगठनों में कोई भेदभाव नहीं करती।"

उन्होंने कहा कि धर्मनिरपेक्षता का मतलब किसी धर्म का अपमान नहीं बल्कि सभी धर्मो का सम्मान और दूसरों के धर्मो और विश्वास उत्सव होता है।

उन्होंने कहा, "हम अपने इतिहास को नुकसान पहुंचाने वाले व्यक्तिओं, संस्थाओं और विचारधाराओं के हानिकारक प्रभाव को नजरअंदाज नहीं कर सकते। वे धार्मिक पूर्वाग्रह फैलाने और धर्म की आड़ में लोगों को हिंसा के लिए उकसाते हैं।"

इससे पहले उन्होंने अपने सम्बोधन की शुरुआत में पूर्व प्रधानमंत्रियों को याद करते हुए देश की धर्मनिरपेक्ष छवि को बनाए रखने के लिए साम्प्रदायिकता से लड़ने की जरूरत बताई।

कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने लम्बे भाषण में 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले को लेकर विपक्ष द्वारा संसद को नहीं चलने देने की भी आलोचना की।

सोनिया ने भाजपा को कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा के खिलाफ भ्रष्टाचार के कथित आरोपों में कार्रवाई करने की चुनौती देते हुए कहा कि मुख्य विपक्षी दल ने राजनीतिक ब्लैकमेल के लिए संसद को 'बंधक' बना लिया।

उन्होंने कहा, "क्या भाजपा संसद को ठप्प करने को न्यायोचित ठहरा सकती है? संसद को राजनीतिक ब्लैकमेल के लिए बंधक नहीं बनाया जा सकता।"

यद्यपि, उन्होंने स्वीकार किया कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि भ्रष्टाचार सभी स्तरों पर बीमारी बन गई है। सोनिया ने कहा, "भ्रष्टाचार के खिलाफ नरमी बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। हमने जांच लम्बित होने के बावजूद मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों को पद छोड़ने के लिए कहा है।"

पार्टी के मुख्यमंत्रियों को 'भ्रष्टाचार को जन्म देने वाले' भूमि आवंटन से सम्बद्ध अधिकार की समीक्षा करनी चाहिए और उसे त्याग कर एक मिसाल कायम करनी चाहिए।

कर्नाटक की भाजपा सरकार को निशाना बनाते हुए सोनिया ने कहा, "मैं चाहूंगी कि कांग्रेस के सभी मुख्यमंत्री ऐसे अधिकारों (भूमि आवंटन के विवेकाधीन अधिकार) की समीक्षा कर और उन्हें त्याग कर मिसाल कायम करें।"

उन्होंने कहा कि पार्टी भ्रष्टाचार को किसी भी रूप में स्वीकार नहीं करेगी। भ्रष्टाचार पर विपक्षी दलों के रुख की आलोचना करते हुए सोनिया ने कहा कि कांग्रेस ने एक मिसाल कायम की है और केवल आरोप के आधार पर मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों के इस्तीफे लिए हैं।

उन्होंने अपने सम्बोधन में पार्टी से अपनी विरासत पर गर्व करने के साथ-साथ आत्मनिरीक्षण करने की बात कही। "आज हम पार्टी की 125वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। पिछले एक दशक में पार्टी ने कई जीत और हार देखी हैं। भविष्य के लिए हमें एक मजबूत इच्छाशक्ति को दिखानी होगी।" उन्होंने कहा कि हमें अपनी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए आत्मनिरीक्षण करना होगा।

सोनिया ने कहा कि राष्ट्र की समृद्धि के प्रति प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के 'अचल समर्पण' की वजह से पार्टी उनके साथ 'मजबूती' से खड़ी है। उन्होंने प्रधानमंत्री पर विपक्ष द्वारा किए जा रहे व्यक्तिगत हमलों को 'निंदनीय' करार दिया।

सोनिया ने कहा, "मनमोहन सिंह ने राष्ट्र की प्रगति और समृद्धि के प्रति दृढ़ समर्पण दर्शाया है। पार्टी उनके साथ मजबूती से खड़ी है।"

सोनिया ने कहा, "मैं हमारे प्रधानमंत्री के बारे में कुछ कहना चाहूंगी। वह 'संयम, गरिमा और निष्ठा' की प्रतिमूर्ति हैं। उन पर भाजपा का व्यक्तिगत हमला निंदनीय है।"

उन्होंने कहा, "तूफान में भी शांत रहने के उनके विवेकपूर्ण नेतृत्व, राष्ट्र की समृद्धि के प्रति प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के 'अचल समर्पण' के लिए मैं उन्हें बधाई देना चाहूंगी।"

कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का जबरदस्त समर्थन ऐसे मौके पर किया जब 2 जी स्पेक्ट्रम घोटााले और भ्रष्टाचार के अन्य मामलों में उनकी कथित अकर्मण्यता के लिए भाजपा और अन्य राजनीतिक दलों ने उनकी आलोचना की है।

पार्टी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा किए जाने पर कड़ा रुख अपनाते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी के लिए यह जरूरी है कि वह जमीनी कार्यकर्ताओं की बात ध्यान से सुने क्योंकि वे पार्टी के लिए 'कान' होते हैं और वे जमीनी हकीकत जानते हैं।

उन्होंने कहा, "पार्टी के नेताओं की जिम्मेदारी बनती है कि वे संगठन को गम्भीरता से लें और उनकी राय पर संवेदनशील बने। कार्यकर्ताओं की बात सुनी जानी चाहिए और जरूरी होने पर अवश्य कार्रवाई की जानी चाहिए।" उन्होंने कहा कि हमें नहीं भूलना चाहिए कि पार्टी ही है जो सरकार बनाती है।

उन्होंने कहा कि संगठन में अधिक युवाओं को शामिल किए जाने के लिए पार्टी ने काफी काम किया है।

हाल ही में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन के संदर्भ में सोनिया ने कहा कि वहां पर पार्टी को जमीनी स्तर पर तैयार करना होगा, इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है, हालांकि आगे का रास्ता कठिन है।

पार्टी नेताओं को अपनी ईमानदारी और जवाबदेही के प्रति किसी किस्म के संदेह की गुंजाइश नहीं छोड़ने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा, "सादगी और मितव्ययता का रास्ता अपनाया जाना चाहिए।" उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि पार्टी कार्यकर्ताओं को शादी या जन्मदिवस समारोह मनाना छोड़ देने चाहिए।

उन्होंने कहा, "ऐसे समारोह संयमित रूप से मनाए जा सकते हैं। हमें मिसाल कायम करनी चाहिए। दौलत का अभद्र प्रदर्शन बंद होना चाहिए।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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