उपग्रह जीसैट-5पी की उल्टी गिनती रविवार से
चेन्नई, 18 दिसम्बर (आईएएनएस)। भारत का सबसे बड़ा संचार उपग्रह जीसैट-5पी सोमवार को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। इसकी उल्टी गिनती रविवार सुबह 11.01 बजे शुरू होगी। यह उपग्रह दूरसंचार को जारी रखने तथा टीवी एवं मौसम पूर्वानुमान सेवा में मददगार साबित होगा। इससे पहले 1999 में ेसंचार उपग्रह छोड़ा गया था, जिसकी कार्य अवधि अब पूरी होने को है।
जीसैट-5पी को यहां से लगभग 80 किलोमीटर दूर श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से अंतरिक्ष में छोड़ा जाएगा।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के निदेशक (प्रकाशन एवं जनसंपर्क) एस. सतीश ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "उल्टी गिनती से पूर्व की सभी गतिविधियां अच्छी तरह चल रही हैं। दूरसंचार उपग्रह को अंतरिक्ष में लेकर जाने वाला उपग्रह प्रक्षेपण यान (जीएसएलवी) जीसैट-5पी को लेकर सोमवार शाम रवाना होगा।"
जीएसएलवी यान 51 मीटर ऊंचा और 418 टन भारी होगा। इसके निर्माण पर लगभग 175 करोड़ रुपये का खर्च आया है। इस बार यान पहले से अधिक भारी 2,310 किलोग्राम भार के उपग्रह को लेकर जाएगा, जिसका मूल्य 125 करोड़ रुपये है।
जीएसएलवी इस बार अपने सामान्य आकार से दो मीटर अधिक लंबा और चार टन अधिक भारी है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के मानक के अनुसार प्रक्षेपण के समय जीएसएलवी की ऊंचाई 49 मीटर और भार 414 टन होता है।
विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र के निदेशक पी. एस. वीराराघवन ने आईएएनएस से कहा कि इस बार यान में अधिक क्रायोजेनिक ईंधन डाला जाएगा और उड़ान भरने की क्षमता भी बढ़ाई गई है।
उल्लेखनीय है कि जीएसएलवी की भार ढोने की क्षमता पिछले कई सालों में निरंतर बढ़ती गई है। यान 2001 में 1,530 किलाग्राम भार के उपग्रह जीसैट-1 को लेकर अंतरिक्ष में गया था। वहीं अप्रैल 2010 में यह 2,220 किलोग्राम भार के जीसैट-4 को लेकर गया था।
नया उपग्रह 2,310 किलोग्राम भारी है। इसमें 36 ट्रांसपोंडर लगे हैं। प्रक्षेपण के सफल रहने पर पृथ्वी की कक्षा में इसरो के ट्रांसपोंडरों की कुल संख्या बढ़कर 235 हो जाएगी।
यह दूरसंचार उपग्रह 1999 में भेजे गए उपग्रह का स्थान लेगा और इसके जरिये संचार, टेलीविजन और मौसम की भविष्यवाणी की सुविधाएं सतत मिलती रहेंगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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