गोवा के लिए बेहतर होते 'छोटे एसईजेड'
नितिन कुनकोलिएंकर ने कहा कि गोवा सरकार को सामाजिक संस्थाओं के विरोध के कारण एसईजेड नीति को पूरी तरह रद्द नहीं करना चाहिए था।
गोवा सरकार ने राज्य के अलग-अलग हिस्सों में सात जगहों पर कुल 32 लाख वर्ग मीटर भूमि पर विशेष आर्थिक क्षेत्रों का विकास करने के लिए सात कम्पनियों का चुनाव किया था। योजना को बाद में सामाजिक संस्थाओं के विरोध के कारण सरकार ने रद्द कर दिया था।
जिन कम्पनियों को एसईजेड का विकास करने का ठेका मिला था, उन्होंने सरकार के फैसले के खिलाफ अदालत में गुहार लगाई। अदालत ने उनकी याचिका को यह कहकर खारिज कर दिया कि एसईजेड के लिए भूमि का आवंटन गैरकानूनी तरीके से किया गया और इसके लिए अनुचित तौर पर जल्दबाजी की गई।
इधर विपक्षियों ने सरकार पर इसमें 100 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगा दिया था।
कुनकोलिएंकर ने कहा कि राज्य में अवसर की कमी के कारण प्रतिभा का पलायन हो रहा है। इससे राज्य का सामाजिक ताना-बाना गड़बड़ा रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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