विकिलीक्स खुलासा : भारतीय पुलिस यातना देती है
अप्रैल 2006 के इस संदेश में कहा गया है कि फोरेंसिक विज्ञान में भारत कमजोर है। कुछ ही पुलिस अधिकारी इस मामले में प्रशिक्षित हैं, जो फोरेंसिक से सम्बंधित काम कर सकते हैं।
संदेश में कहा गया है कि बाकी तमाम जानकारियां कैदियों को धमका कर या फिर प्रताड़ित कर हासिल की जाती हैं।
संदेश में कहा गया है, "भारत में फोरेंसिक कमजोर है। केवल दो डीएनए प्रयोगशालाएं ही पूरे देश को सेवाएं प्रदान करती हैं।"
ब्रिटिश समाचार पत्र 'गार्जियन' में प्रकाशित इस संदेश में कहा गया है, "बड़े शहरों के बाहर कुछ ही पुलिस अधिकारी इलेक्ट्रॉनिक आंकड़े लेने और उसकी हिफाजत करने में प्रशिक्षित हैं। यद्यपि घरेलू साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण और अमेरिकी एजेंसियों के साथ सहयोगी प्रशिक्षण के तहत भारत की यह क्षमता बढ़ रही है।"
संदेश में कहा गया है कि इसके परिणामस्वरूप आतंकी जांच और अदालती मामले कैदियों द्वारा दिए जाने वाले बयानों पर निर्भर होते हैं। इनमें से कई सारी जानकारियां दबाव बना कर ही हासिल की जाती हैं, भले ही प्रताड़ित न किया जाता हो।
ये कारक, जर्जर और भ्रष्ट न्यायपालिका के साथ मिलकर मामलों को अदालतों में वर्षो तक लम्बित पड़े रहने में योगदान करते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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