विकिलीक्स ने भारत में अमेरिकी हस्तक्षेप को बेनकाब किया : माकपा
नई दिल्ली, 18 दिसम्बर (आईएएनएस)। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने शनिवार को कहा कि अमेरिकी दूतावास से भेजे संदेशों के विकिलीक्स खुलासे से भारत-अमेरिका सम्बंधों की सच्ची तस्वीर सामने आ गई है और यह भी कि भारत के घरेलू राजनीतिक मामलों में अमेरिका का किस हद तक हस्तक्षेप है।
माकपा ने एक बयान में कहा है, "अमेरिकी दूतावास ने परमाणु समझौते पर भारत की राजनीतिक पार्टियों को और राय देने वालों को प्रभावित करने के लिए, विदेशी नीति सम्बंधी मामलों पर दबाव बनाने के लिए (जैसे कि ईरान के प्रति रुख) जिस तरीके से हस्तक्षेप किया है, वह सब बेनकाब हो गया है।"
बयान में कहा गया है कि भारतीय अधिकारी सार्वजनिक रूप से यह बात स्वीकार करने में शर्म महसूस करते हैं कि भारत और अमेरिका ने विदेशी नीतियों में सहयोग करना शुरू कर दिया है।
माकपा ने कहा है, "संदेशों से यह उजागर हो गया है कि दिल्ली को सहयोग के लिए बाध्य करने हेतु सम्बंधों को कितना बढ़ाया गया है। इससे भारत-अमेरिका के बीच परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद भारत-अमेरिका के वास्तविक रिश्ते की स्थिति उजागर हो गई है।"
बयान में एक संदेश का जिक्र किया गया है, जिसमें कहा गया है कि अमेरिका "मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली मौजूदा भारत सरकार में एक सच्चा साझेदार है।"
माकपा ने कहा है, "विकिलीक्स खुलासे से यह बात उजागर हो गई है कि अमेरिका केवल अपने साम्राज्यवादी हितों के बारे में सोचता है। अमेरिका के कुछ हितों को साधने में मनमोहन सिंह सरकार की साठगांठ दुर्भाग्यपूर्ण है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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