विकिलीक्स खुलासा : भारत की धर्मनिरपेक्षता प्रशंसनीय
ब्रिटिश समाचार पत्र ' द गार्जियन' में प्रकाशित अप्रैल 2006 के इस संदेश में कहा गया है कि भारतीय संदर्भ में धर्मनिरपेक्षता का पर्याय सभी धर्मो के लिए सहनशीलता है और धर्म विहीन जीवन निर्थक माना जाता है।
संदेश में कहा गया है कि भारत लोकतांत्रिक, विविध धर्मो, विविध संस्कृतियों, बहुरंगी, बहु-जातीय समाज है, जहां दुनिया के सभी प्रमुख धर्मो को मानने की आजादी है।
इसमें कहा गया है कि कई तरह के धार्मिक उग्रवाद के इक्का-दुक्का उदाहरण भी देखने को मिलते हैं विशेषकर हिंदुओं, मुस्लिमों और सिखों में, लेकिन इन चरमपंथियों से कहीं ज्यादा तादाद धर्मनिरपेक्ष उदारवादियों की है।
संदेश में कहा गया है कि ऐसे समय में जब बहुत से देश उग्रवादी आंदोलनों से शिकस्त झेल रहे हैं, भारत साम्प्रायिक सह-अस्तित्व, अहिंसक राजनीतिक प्रदर्शनों, प्रेस की आजादी और राजनीतिज्ञों को इस बात का अहसास होने कि धार्मिक नफरत से वोट नहीं मिलते, वैश्वीकरण और समृद्ध भारतीय निर्वाचक मंडल की बदौलत सही दिशा में अग्रसर है।
संदेश में यह चेतावनी भी दी गई है कि साम्प्रदायिक हिंसा भड़कने की इक्का-दुक्का घटनाओं का खतरा हमेशा रहता है। ऐसा दशकों से भारत को निशाना बना रहे आतंकवाद की प्रतिक्रियास्वरूप या फिर अपने तुच्छ राजनीतिक उद्देश्यों के लिए क्षेत्रीय राजनीतिज्ञों द्वारा भड़काए जाने से होता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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