भारत आतंकवाद पर ज्यादा जानकारी नहीं देता : अमेरिका

ब्रिटिश समाचार पत्र 'गार्जियन' में प्रकाशित 23 फरवरी, 2007 के इस संदेश में भारतीय सुरक्षा बलों पर भी बुरी तरह हमला किया गया है। सुरक्षा बलों को भ्रष्ट और अल्प प्रशिक्षित बताया गया है और कहा गया है कि वे ठोस फोरेंसिक जांच नहीं कर पाते।

संदेश में यह भी बताया गया है कि आतंकवाद से मुकाबले के मुद्दे पर साझेदारी को लेकर भारत और अमेरिका में दूरी क्यों है।

संदेश में कहा गया है, "पाकिस्तान के प्रति अमेरिकी नीतियों पर विश्वास करने में भारत की ऊहापोह, स्वतंत्र विदेशी नीति का उसका रुख, अपनी सुरक्षा के प्रति अकेले आगे बढ़ने की उसकी पारम्परिक रणनीति, और उसकी विशाल मुस्लिम आबादी की भावनाओं को लेकर घरेलू राजनीतिक संवेदनशीलता ने आतंकवाद से संयुक्त मुकाबले की रणनीति पर हमारे साथ काम करने में भारत की सतर्कता में भारी योगदान दिया है।"

संदेश में कहा गया है कि जहां भारत आतंकवाद से मुकाबले के अपने प्रयासों की मजबूती के लिए हमसे सूचना और प्रौद्योगिकी हासिल करने को बहुत उत्सुक है, वहीं बदले में वह बहुत कम देना चाहता है। जबकि हमारा मानना है कि भारत को इस सम्बंध में बराबर का साझेदार होना चाहिए।

संदेश में कहा गया है, "भारत आतंकी हमलों की जांच में हमारे मदद के प्रस्ताव को बार-बार खारिज कर देता है और प्रशिक्षण और मदद के हमारे प्रस्ताव को बहुत ही बेमन से स्वीकार किया जाता है।"

संदेश में कहा गया है कि भारतीय पुलिस और सुरक्षा बलों के पास काम का बहुत बोझ है और पुलिस के बुरे आचरणों के कारण उनका काम प्रभावित भी हुआ है। पुलिस पूछताछ में बड़े पैमाने पर यातना का इस्तेमाल करती है, साथ ही वह भ्रष्ट है, अल्प प्रशिक्षित है, और वह ठोस फोरेंसिक जांच कर पाने में भी अक्षम है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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