आतंकवाद को पाकिस्तानी समर्थन से भारत चिंतित
ब्रिटिश समाचार पत्र 'गार्जियन' द्वारा प्रकाशित एक संदेश में भारत में आतंकवाद के अतिरिक्त क्षेत्रीय आयामों के बारे में कहा गया है कि जिहादी आतंकवाद भारत-पाकिस्तान सम्बंधों के बीच एक बड़ा रोड़ा है।
यह संदेश इस वर्ष 30 जनवरी व 19 फरवरी के बीच का है। उस समय एम.के.नारायणन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) थे।
एक संदेश में सरकारी बयानों व भारतीय मीडिया के हवाले से कहा गया है कि सीमा पार से घुसपैठ में मार्च-अप्रैल में काफी कमी आई है। मार्च में शून्य घुसपैठ की स्थिति शायद भयानक बर्फबारी के कारण थी। लेकिन संदेश में आगे कहा गया है कि भारतीय नौकरशाही और सुरक्षा एजेंसियों में घुसपैठ को लेकर फिर भी आशंका बनी हुई है।
संदेश में कहा गया है, "भारत सरकार के हमारे अधिकांश वार्ताकार मानते हैं कि द्विपक्षीय मामलों के अन्य पहलुओं को प्रभावित करने के लिए और कश्मीर मुद्दे को जिंदा रखने के लिए इस्लामाबाद अपनी सुविधानुसार सीमा पार से आतंकवाद के दरवाजे खोलता व बंद करता रहता है।"
संदेश में आगे कहा गया है, "राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नारायणन ने मार्च में ब्रिटिश उच्चायुक्त से कहा था कि वह नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर होने वाली घुसपैठ की बनिस्पत भारत में आतंकियों को मिल रहे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों के समर्थन से ज्यादा चिंतित हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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