विकिलीक्स ने प्रताड़ना पर हमारा रुख सही साबित किया : अलगाववादी
कट्टरपंथी अलगाववादी नेता सैयद अली गिलानी ने यहां संवाददाताओं को बताया, "इस खुलासों में नया कुछ नहीं है। भारतीय सेना पिछले 20 वर्षो से लोगों की भावनाओं को कुचलने के लिए बंदियों को अमानवीय व क्रूर तरीके से प्रताड़ित कर रही है।"
गिलानी ने दावा किया कि उन्हें भी राज्य व राज्य के बाहर की जेलों में थर्ड डिग्री की प्रताड़ना का शिकार होना पड़ा है।
हुर्रियत के नरमपंथी धड़े के अध्यक्ष, मीरवाइज उमर फारुख ने कहा, "इन खुलासों ने कश्मीरी जेलों में होने वाली प्रताड़ना के बारे में हमारा रुख सही साबित कर दिया है।"
मीरवाइज ने कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अमेरिका जानबूझकर कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन पर चुप्पी साधे हुए है। जबकि वह म्यांमार और अन्य देशों में मानवाधिकार उल्लंघनों पर बोलता है।"
जम्मू एवं कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के अध्यक्ष मुहम्मद यासीन मलिक ने कहा, "हमारे शरीर प्रताड़ना के प्रमाण हैं और 1990 के दशक में मेरे सहयोगियों को और मुझे खुद क्रूरता के साथ प्रताड़ित किया गया था।"
विकिलीक्स खुलासे पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा, "हमारी पार्टी को पीडीपी शासन काल में मानवाधिकारों की स्थिति में हुए सुधार के बारे में न तो विकिलीक्स के प्रमाण की जरूरत है और न नेशनल कांफ्रेंस के प्रमाण की ही।"
ज्ञात हो कि मुख्यमंत्री उमर ने विकिलीक्स खुलासे पर अपनी टिप्पणी में कहा था कि यह मामला 2005 का है, जब राज्य में पीडीपी-कांग्रेस गठबंधन की सरकार थी।
महबूबा ने कहा कि कश्मीर की जनता असली निर्णायक है और वह इस मामले पर अंतिम निर्णय जनता पर ही छोड़ रही हैं।
ज्ञात हो कि विकिलीक्स के ताजा खुलासे में यह बात सामने आई है कि अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति (आईसीआरसी) ने जम्मू एवं कश्मीर में सैकड़ों बंदियों को बिजली का करंट लगाने, उनकी पिटाई करने और उनकी यौन प्रताड़ना के बारे में दिल्ली स्थिति अमेरिकी राजनयिकों को बताया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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