विकिलीक्स खुलासा : हिरासत में यातना से भारत का इंकार (राउंडअप)

उधर, जम्मू एवं कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को मानवाधिकार के उल्लंघन पर विकिलीक्स के खुलासे पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया।

समाचार पत्र 'गार्जियन' द्वारा शुक्रवार को विकिलीक्स द्वारा किए गए ताजे खुलासे में बताया गया है कि आतंकवादी संगठन अल कायदा के सरगना ओसामा बिन लादेन ने कहा था कि वह जिहादियों को 'धन की कमी नहीं होने देगा।'

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विष्णु प्रकाश ने कहा, "मानवाधिकार के उल्लंघन का मामला उजागर होने पर उसे शीघ्रता और कड़ाई से निपटा जाता है। इसके प्रभावी और निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए एक कानूनी तंत्र मौजूद है।"

सरकार की यह प्रतिक्रिया समाचार पत्र 'गार्जियन' में प्रकाशित विकिलीक्स के खुलासे की बाद आई है। विकिलीक्स के खुलासे में बताया गया है कि अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रास समिति (आईसीआरसी)ने 2005 में दिल्ली स्थित अमेरिकी राजनयिकों को, कश्मीर में हिरासत में रखे गए सैकड़ों लोगों को बिजली का करंट लगाने, उनकी पिटाई करने और यौन उत्पीड़न किए जाने के बारे में बताया था।

प्रवक्ता ने बताया कि भारत नागरिकों के कल्याण की चिंता करने वाले मुद्दों पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बातचीत करने की एक स्वस्थ परंपरा रखता है। ये मुद्दे चाहे देश के किसी भाग में हों।

उन्होंने कहा, "हमारे अंतर्राष्ट्रीय मित्रों और सहयोगियों ने जब कभी भी ऐसे मुद्दों को उठाया है, हम कभी भी बातचीत से पीछे नहीं हटे हैं।"

उधर, आईसीआरसी ने इस मसले पर कोई टिप्पणी करने से इंकार किया है। उसने कहा है, "वह गोपनीय संदेशों के खुलासे पर टिप्पणी करने परहेज करेगा।" क्योंकि "यह मामला नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास और वाशिंगटन के बीच आंतरिक संवाद का है।"

उधर, जम्मू एवं कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को कहा कि उनकी सरकार प्रताड़ना को नजरअंदाज नहीं करती। इसके साथ ही उमर ने राज्य में मानवाधिकारों के उल्लंघन के बारे में विकिलीक्स द्वारा किए गए खुलासे पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया।

उमर ने नवम्बर 2002 से अगस्त 2008 तक राज्य में सत्तारूढ़ रही पीपुल डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) और कांग्रेस गठबंधन सरकार का जिक्र करते हुए कहा, "मैं इस मामले में नहीं पड़ना चाहता.. यह 2005 का मामला है और आप जानते हैं कि उस समय राज्य में किसकी सरकार थी।"

आईसीआरसी के कर्मचारी ने अमेरिकी राजनयिकों को बताया था कि आईसीआरसी के लोगों ने जम्मू एवं कश्मीर और भारत के अन्य हिस्सों में स्थित बंदी गृहों का 2002 व 2004 के बीच 177 बार दौरा किया था और 1,491 बंदियों से मुलाकात की थी। उन्होंने 1,296 बंदियों का निजी तौर पर साक्षात्कार भी किया था।

आईसीआरसी ने कहा है कि इनमें से 852 मामलों में बंदियों ने बुरे बर्ताव की बात कही थी। इनमें से 171 ने पिटाई की शिकायत की और 681 ने कहा कि उन्हें प्रताड़ना के छह तरीकों में से एक या उससे अधिक तरीके से प्रताड़ित किया गया।

वहीं, विकिलीक्स द्वारा जारी अमेरिकी गोपनीय राजनयिक संदेशों के मुताबिक आतंकवादी संगठन अल कायदा के सरगना ओसामा बिन लादेन ने कथित रूप से जम्मू एवं कश्मीर में लड़ने वाले जिहादियों को अपने समर्थन का वादा किया था। उसने कहा था कि वह जिहादियों को 'धन की कमी नहीं होने देगा।'

समाचार पत्र 'गार्जियन' ने शुक्रवार को यहां विकिलीक्स द्वारा किए गए ताजे खुलासे को प्रकाशित किया है।

अमेरिकी अधिकारियों के साथ एक बैठक में संयुक्त सचिव (मंत्रिमंडल सचिवालय) शरद कुमार ने कहा कि भारतीय खुफिया अधिकारियों के पास अमेरिका में 9/11 को हुए हमले के पहले ओसामा बिन लादेन और तालिबान सरगना मुल्ला उमर के बीच हुई बैठक का लिखित प्रमाण है।

कुमार ने कहा कि ओसामा ने कश्मीर में चलने वाले आतंकवाद के लिए "दो करोड़ डॉलर देने की इच्छा जताई।" ओसामा ने कश्मीरी जेहादियों को अपने संदेश में कहा था, "वह उन्हें धन की कमी नहीं होने देगा।"

वहीं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने कहा कि हिरासत में दी जाने वाली यातना कश्मीर के लोगों की उम्मीदों और भावनाओं के साथ एक धोखा है। दोषियों को इसकी सजा मिलनी चाहिए।

सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश ने आईएएनएस को बताया, "कश्मीर में इस वर्ष जारी हिंसा के लिए युवकों को बार बार जिम्मेदार ठहराया गया। सरकार और अधिकारियों पर युवकों का विश्वास न होने से वहां मानवाधिकार का उल्लंघन साफ हो जाता है।"

'पीपुल्स यूनियन फॉर सिविक लिबर्टीज' के महासचिव पुष्करराज ने आईएएनएस को बताया, "कश्मीर हमेशा से मानवाधिकार उल्लंघन का केंद्र रहा है। यह उल्लंघन एक सख्त यातना विरोधी अधिनियम की मांग करता है, ताकि हिरासत में यातना के मामलों को रोका जा सके।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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