राजा का प्रधानमंत्री को लिखा पत्र अभद्रतापूर्ण : न्यायालय
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा नए टेलीकॉम आवेदकों के लिए 2जी स्पेक्ट्रम की नीलामी की सलाह पर राजा ने 2 नवंबर 2007 को उन्हें पत्र लिखा था। इसमें राजा ने कहा था कि यदि स्पेक्ट्रम की नीलामी प्रधानमंत्री की सलाह पर की जाती है तो वह 'अनुचित, भेदभावपूर्ण और मनमाना' होगा।
पूर्व मंत्री ने यह भी कहा कि यदि प्रधानमंत्री की सलाह पर नीलामी की प्रक्रिया अपनाई जाती है तो इससे नए और पुराने टेलीकॉम आपरेटरों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धी माहौल नहीं बनेगा।
गत दो दिसम्बर 2010 को मामले की सुनवाई के दौरान न्यायाधीश जी.एस. सिंघवी और न्यायाधीश अशोक कुमार गांगुली की पीठ ने राजा द्वारा प्रधानमंत्री को लिखे गए पत्र में इस्तेमाल किए गए शब्दों को गंभीरता से लिया। राजा ने प्रधानमंत्री को यह पत्र 2 नवंबर 2007 को लिखा था।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने प्रधानमंत्री के प्रति 'संयमित' न होने और 'असम्मान' दिखाने पर राजा की खिंचाई की थी।
फैसले में यह भी बताया गया है कि राजा 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन की कीमतें वर्ष 2001 के आधार पर तय करने के लिए उतावले थे। इसके लिए उन्होंने वित्त एवं कानून मंत्रालयों के सुझावों को ठुकराने के साथ ही दूरसंचार आयोग के साथ होने वाली अपनी बैठक को भी स्थगित किया।
दूरसंचार आयोग के साथ राजा की बैठक 9 जनवरी 2008 को प्रस्तावित थी। इस बैठक में 'स्पेक्ट्रम की कीमतें' तय होनी थीं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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