चण्डीगढ़ में मेहमान बन पहुंचे प्रवासी पक्षी
चण्डीगढ़, 17 दिसम्बर (आईएएनएस)। अपने प्राकृतिक पर्यावासों में पड़ रही कड़ाके की सर्दी से बचने के लिए प्रवासी पक्षियों ने चण्डीगढ़ की सुखना झील और इस क्षेत्र के अन्य 190 जल संग्रह क्षेत्रों का रुख किया है। इन पक्षियों के लिए ऐसे इंतजाम किए गए हैं कि उन्हें यहां भी अपने घर जैसा एहसास हो।
नवंबर की शुरुआत से ही सुखना वन्यजीव अभयारण्य में प्रवासी पक्षियों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था और वे यहां मार्च या अप्रैल तक ठहरेंगे। वैसे उनका यहां ठहरना यहां की जलवायु की स्थितियों पर निर्भर करता है।
इन मेहमानों की मेजबानी करना कोई आसान काम नहीं है। चण्डीगढ़ के मुख्य वन्यजीव वार्डन व वन संरक्षक संतोष कुमार ने आईएएनएस को बताया, "विभिन्न सर्द देशों और हिमालय क्षेत्रों से प्रवासी पक्षी चण्डीगढ़ में आना शुरू कर देते हैं। वे सुखना वन्यजीव अभयारण्य की सुखना झील व अन्य जल संग्रह क्षेत्रों में इकट्ठे होने लगते हैं।"
उन्होंने कहा कि ये पक्षी बहुत संवेदनशील होते हैं इसलिए यहां उनके अनुकूल वातावरण बनाने की कोशिश की गई है।
उन्होंने बताया, "झील और अभयारण्य के नजदीक किसी को भी तेज संगीत बजाने या पटाखे चलाने की इजाजत नहीं है क्योंकि इससे उनकी जीवनशैली प्रभावित हो सकती है। इसके साथ वन सुरक्षाकर्मी और अधिकारी शिकारियों पर कड़ी नजर रखे हुए हैं।"
यहां साइबेरिया, चीन और अफगानिस्तान से प्रवासी पक्षी आते हैं। इनमें ब्रह्मी बत्तखें, मध्यम आकार की गोताखोर बत्तखें (कॉमन पोचार्ड), बड़ी गोताखोर बत्तखें (रेड-क्रीस्टेड पोचार्ड), शुद्ध जल में तैरने वाले पक्षी (ग्रीबीस), हंस, किंगफिशर व कई अन्य प्रकार के पक्षी शामिल हैं।
प्रवासी पक्षियों के साथ उन्हें देखने के लिए यहां बड़ी संख्या में पर्यटक भी पहुंचते हैं। चण्डीगढ़ प्रशासन ने पक्षियों की हरकतों के दीदार के लिए यहां एक 'स्पॉटिंग स्कोप' लगाने का निर्णय लिया है।
कुमार ने बताया कि शुरुआत में केवल एक ही 'स्पॉटिंग स्कोप' लगाया जाएगा। पक्षियों को देखने के लिए आने वाले पर्यटक, छात्र और पर्यावरणविद इसकी मदद से विदेशी मेहमानों को देख सकेंगे।
वर्ष 2009 में चण्डीगढ़ में करीब 8,000 प्रवासी पक्षी आए थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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