'तम्बाकू उद्योग के दबाव से उत्पादों पर चेतावनी में देरी'
स्वयंसेवी संगठन (एनजीओ) 'वॉलंट्री हेल्थ एसोसिएशन' (वीएचएआई) ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के जरिए इस देरी की वजह जाननी चाही थी। सरकार ने अपने जवाब में स्वीकार किया है कि तम्बाकू उद्योग व उसके सहयोगियों के दबाव के चलते इन उत्पादों के पैकेटों पर चेतावनी वाली तस्वीरें प्रकाशित करने में विलम्ब हो रहा है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने जवाब में कहा है कि तम्बाकू उद्योग, दुकानदारों और खुदरा विक्रेताओं ने पैकेट्स पर तस्वीरों में चेतावनी दिए जाने की तय समय सीमा बढ़ाने की मांग की थी। इसलिए तकनीकी परेशानियों को देखते हुए इस समय सीमा को एक जून से बढ़ाकर एक दिसम्बर 2010 कर दिया गया था।
टोबैको इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, आईटीसी लिमिटेड, पान मसाला एसोसिएशन ऑफ इंडिया, ऑल इंडिया बीड़ी इण्डस्ट्री फेडरेशन, पान शॉप ओनर्स एसोसिएशन व अन्य कम्पनियों ने तय अवधि बढ़ाने की मांग की थी।
आईटीसी ने मंत्रालय को लिखे पत्र में नई तस्वीरों के नए डिजाइन तैयार करने में वक्त लगने की बात कही थी तो 'पान शॉप ओनर्स एसोसिएशन' का कहना था कि इससे उनके व्यापार को नुकसान पहुंचेगा।
मंत्रिमंडल ने सात दिसम्बर को तम्बाकू उत्पादों के पैकेटों पर तस्वीरों में चेतावनी दिए जाने की निर्धारित समय सीमा एक साल के लिए बढ़ा दी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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