हम प्रताड़ना को नजरअंदाज नहीं करते : उमर
श्रीनगर, 17 दिसम्बर (आईएएनएस)। जम्मू एवं कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को कहा कि उनकी सरकार प्रताड़ना को नजरअंदाज नहीं करती। इसके साथ ही उमर ने राज्य में मानवाधिकारों के उल्लंघन के बारे में विकिलीक्स द्वारा किए गए खुलासे पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया।
उमर ने नवम्बर 2002 से अगस्त 2008 तक राज्य में सत्तारूढ़ रही पीपुल डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) और कांग्रेस गठबंधन सरकार का जिक्र करते हुए कहा, "मैं इस मामले में नहीं पड़ना चाहता.. यह 2005 का मामला है और आप जानते हैं कि उस समय राज्य में किसकी सरकार थी।"
उमर ने कहा, "हम प्रताड़ना को नजरअंदाज नहीं करते। हमने ऐसा न तो कभी किया है और न तो कभी करेंगे।" उन्होंने कहा कि राज्य में आतंकवाद के 20 साल के इतिहास में उनकी पहली ऐसी सरकार है, जिसने ऐमनेस्टी इंटरनेशनल को राज्य का दौरा करने की अनुमति दी।
मुख्यमंत्री अब्दुल्ला की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब विकिलीक्स द्वारा जारी नए संदेशों में यह बात सामने आई है कि अंतर्राष्ट्रीय रेडक्रॉस समिति (आईसीआरसी) ने 2005 में दिल्ली स्थित अमेरिकी राजनयिकों को, कश्मीर में हिरासत में रखे गए सैकड़ों लोगों को बिजली का करंट लगाने, उनकी पिटाई करने और उनका यौन उत्पीड़न किए जाने के बारे में बताया था।
समाचार पत्र, 'गार्जियन' ने शुक्रवार को कहा कि अन्य संदेशों में यह बात सामने आई है कि 2007 में अमेरिकी राजनयिक भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा व्यापक तौर पर किए जा रहे मानवाधिकार उल्लंघनों के बारे में चिंतित थे। राजनयिकों ने कहा है कि भारतीय सुरक्षा बलों के लोग अपराध कबूल करवाने के लिए हिरासत में रखे लोगों को प्रताड़ित करते थे।
दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास से अप्रैल 2005 में भेजे गए एक संदेश में कहा गया था कि आईसीआरसी, भारत सरकार से निराश हो गया था, क्योंकि भारत सरकार ने हिरासत में रखे गए लोगों के साथ दुर्व्यवहार रोकने के लिए कुछ भी नहीं किया।
दूतावास ने अपने संदेश में कहा था कि आईसीआरसी ने यह निष्कर्ष निकाला था कि भारत प्रताड़ना की अनदेखी करता है और प्रताड़ना के शिकार नागरिक और आतंकी नियमित रूप से मारे जा रहे हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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