विकिलीक्स पर जारी राहुल की कथित टिप्पणी से राजनीति गरमाई (लीड-2)
जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)ने इसे गैरजिम्मेदाराना करार देते हुए इस पर प्रधानमंत्री से स्पष्टीकरण मांगा है तो खुद राहुल के हवाले से जारी बयान में कहा गया है कि कांग्रेस आतंकवाद और साम्प्रदायिकता दोनों को खतरा मानती है।
समाचार पत्र 'गार्जियन' में शुक्रवार को प्रकाशित इस संदेश में कहा गया कि राहुल ने रोमर से कहा था कि यद्यपि आतंकी संगठन, लश्कर-ए-तैयबा को भारतीय मुस्लिम समुदाय के कुछ खास तत्वों का समर्थन होने के प्रमाण हैं, लेकिन चरमपंथी हिंदू संगठनों का अभ्युदय ज्यादा खतरनाक हो सकता है। ये हिंदू संगठन धार्मिक तनाव और मुस्लिम समुदाय के साथ राजनीतिक टकराव की स्थिति पैदा करते हैं।
अखबार के अनुसार राहुल ने रोमर से कहा था कि घरेलू स्तर पर तैयार हुए उग्रवादी मोर्चे के कारण पाकिस्तान या भारत के इस्लामी समूहों की ओर से प्रतिक्रियास्वरूप आतंकी हमले किए जा रहे हैं और यह खतरा चिंता का एक विषय है। इस पर बरारबर ध्यान रखे जाने की जरूरत हो गई है।
भाजपा ने शुक्रवार को राहुल की टिप्पणी को गैरजिम्मेदार बताते हुए कहा कि यह आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई के साथ गम्भीर समझौता है। भाजपा ने राहुल की इस टिप्पणी पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से स्पष्टीकरण मांगा है। भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने संवाददाताओं से कहा,"राहुल गांधी ने एक ही झटके में पाकिस्तान के सभी उग्रवादी व आतंकी समूहों और पाकिस्तानी प्रशासन में शामिल कुछ तत्वों के दुष्प्रचार को बढ़ावा देने की कोशिश की है। यह आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई और हमारी सामरिक सुरक्षा के साथ भी गम्भीर समझौता होगा।"
प्रसाद ने इस विवाद में प्रधानमंत्री को घसीटते हुए कहा कि मनमोहन सिंह को राहुल की टिप्पणी पर स्पष्टीकरण देना चाहिए, क्योंकि वह नक्सलवाद को देश के लिए सबसे बड़ा खतरा बताते हैं।
प्रसाद ने कहा, "इससे यह भी जाहिर होता है कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) में कोई तालमेल नहीं है।" उन्होंने कहा कि कट्टरपंथी हिंदू संगठनों पर राहुल की टिप्पणी से यह भी जाहिर होता है कि भारत के बारे में वह कितना कम जानते हैं।
प्रसाद ने कहा, "यह बयान गैरजिम्मेदाराना है, भाजपा इसकी निंदा करती है। यदि राहुल हिंदू आतंकवाद को लेकर चिंतित हैं तो उन्हें उसके बारे में संसद में बोलना चाहिए.. इससे यह पता चलता है कि उन्हें देश के बारे में कितनी कम जानकारी है।" प्रसाद ने, किसी दूसरे देश के राजदूत के साथ राहुल द्वारा इस मुद्दे पर बात किए जाने के उद्देश्य पर भी सवाल खड़ा किया।
भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि राहुल की टिप्पणी से यह जाहिर होता है कि वह आतंक को धर्म के साथ जोड़ना चाहते हैं और वह भारतीय सभ्यता के बारे में नहीं जानते।
जावड़ेकर ने कहा, "आतंकवाद तो आतंकवाद है, इसे वोट बैंक की राजनीति में नहीं बदला जाना चाहिए। आतंकवाद की जांच की जानी चाहिए और दोषी व्यक्ति को हर हाल में दंडित किया जाना चाहिए।"
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के प्रवक्ता राम माधव ने इस बयान को हिंदू विरोधी मानसिकता का परिचायक बताया है। भोपाल में संवाददाताओं से शुक्रवार को बातचीत में माधव ने कहा कि राजनयिक सम्बंधों की सीमा लांघते हुए अमेरिकी राजदूत के पास जाकर अपने आंतरिक मामलों की चर्चा करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके इस कार्य से यह भी स्पष्ट हो रहा है कि उन्हें राजनीति का अनुभव नहीं है।
माधव ने कहा कि हम एक संगठन के नाते यह भी जोड़ना चाहेंगे कि अब यह भी स्पष्ट हो गया है कि हिंदू संगठनों को आतंकवाद के फर्जी आरोपों में फंसाने के षड्यंत्रों का सूत्रधार कौन है। इतना ही नहीं, उनके इस बयान से ऐसा लगता है कि वह जेहाद का परोक्ष रूप से समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने हमारी उस नीति का भी उल्लंघन किया है, जिसके तहत हम विदेशी ताकतों को अपने आंतरिक मामलों में दखल नहीं देना चाहते।
उधर, इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस महासचिव राहुल ने शुक्रवार को कहा कि हर तरह का आतंकवाद और हर तरह की सांप्रदायिकता भारत के लिए बड़ा खतरा है। कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने राहुल की ओर से उनका बयान पढ़ा।
बयान में लिखा था कि "हर तरह का आतंकवाद और सांप्रदायिकता भारत के लिए खतरा हैं। हमें हर तरह के आतंकवाद से सतर्क रहने की आवश्यकता है। यह मायने नहीं रखता कि घटना को अंजाम कौन देता है।" कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी की ओर से भी इसी तरह का एक बयान आया।
गांधी की प्रतिक्रिया आने से पहले कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था कि कट्टरपंथी हिंदू संगठनों पर राहुल गांधी की टिप्पणी के बारे में जारी विकिलीक्स के संदेश की प्रामाणिकता जांचने के बाद ही पार्टी इस पर कोई टिप्पणी करेगी। सिंघवी ने भाजपा की आलोचना को महत्वहीन बताते हुए उसे खारिज कर दिया। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा, "क्या लोग इस तरह के आरोपों पर ध्यान देते हैं?"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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