बुधिया के कोच बिरांची के हत्यारों को उम्रकैद
सरकारी वकील सिद्धार्थ दास ने पत्रकारों को बताया कि फर्स्ट ट्रैक कोर्ट-3 के न्यायाधीश विवेकानंद दास ने बिरांची की हत्या के दोषी करार दिए गए राजा आचार्य और उसके सहयोगी अख्या बेहेरा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोनों को सोमवार को दोषी करार दिया गया था।
न्यायाधीश ने इसके अलावा दोनों दोषियों पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। दोषी अगर जुर्माने की राशि अदा करने में नाकाम रहते हैं तो उन्हें एक अतिरिक्त वर्ष जेल में बिताना होगा।
दास ने सोमवार को कई गवाहों की बात सुनने के बाद आचार्य और बेहेरा को दोषी करार दिया था। इनमें पांच प्रत्यक्षदर्शी भी शामिल हैं। बिरांची की विधवा गीतांजलि ने कहा कि वह अदालत के फैसले से खुश हैं।
बिरांची को 13 अप्रैल, 2008 को जूडो हॉल के बाहर गोली मार दी गई थी। घटना के वक्त बिरांची अपने परिजनों और छात्रों के साथ उड़िया नव वर्ष दिवस मना रहे थे।
बेहरा ने 22 अप्रैल को भोपाल में आत्मसमर्पण कर दिया था जबकि अपहरण, हत्या और जबरन वसूली के कई मामलों में आरोपी आचार्य ने मई में गोवा पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था।
दोनों के खिलाफ पुलिस ने अगस्त 2008 में आरोपपत्र दाखिल किया था। जूडो कोच रहते हुए बिरांची ने छह वर्ष के बुधिया को गोद लिया था और उसे लम्बी दूरी की दौड़ के लिए प्रशिक्षित किया।
बिरांची की देखरेख में बुधिया ने 2006 में पुरी और भुवनेश्वर के बीच 65 किलोमीटर की दूरी सात घंटे में दौड़कर पूरी की थी। इसके बाद उसका नाम लिम्का बुक में शामिल किया गया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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