विकिलीक्स खुलासा : भारत बन सकता है
लंदन, 17 दिसम्बर (आईएएनएस)। विकिलीक्स द्वारा जारी गोपनीय राजनयिक संदेशों के अनुसार अमेरिकी राजनयिक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि भारत जैविक आतंकी हमले का निशाना बन सकता है। इसके तहत एंथ्रेक्स जैसी घातक बीमारियों को भारत में फैलाया जा सकता है और उसके बाद वे बीमारियां पूरी दुनिया में फैल सकती हैं।
समाचार पत्र 'गार्जियन' में शुक्रवार को प्रकाशित रपट के अनुसार कि गोपनीय संदेशों से इस बात का खुलासा हुआ है कि एक वरिष्ठ भारतीय राजनयिक ने अमेरिका को 2006 में बताया था कि जैविक हथियारों की चिंताएं ज्यादा दिनों तक सैद्धांतिक नहीं रहने वाली हैं। भारतीय राजनयिक ने कहा था कि खुफिया सूत्रों ने जानकारी दी है कि आतंकी संगठन जैविक युद्ध के बारे में गहन चर्चा कर रहे हैं।
नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास से वाशिंगटन भेजे गए एक संदेश में कहा गया है, "राजनयिक वाई.के.सिंह ने सूचना दी थी कि भारतीय खुफिया तंत्र ने जेहादी समूहों के बीच हुई वार्ताओं को पकड़ा है, वे जैविक आतंकवाद फैलाने की फिराक में हैं। मिसाल के तौर पर वे जीवविज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी में पीएचडी डिग्रीधारी समान विचारधारा वाले लोगों की तलाश कर रहे हैं।"
संदेश में कहा गया है, "सिंह ने परमाणु आतंकवाद (अभी तक कल्पना के दायरे में) की सम्भावनाओं का जैविक आतंकवाद (आतंकवाद का एक आदर्श हथियार.. एंथ्रेक्स एक गम्भीर समस्या खड़ा कर सकता है ..हमारे लिए यह ज्यादा दिनों तक सैद्धांतिक रूप में नहीं रहने वाला है) से तुलना की थी।"
एक अन्य संदेश में कहा गया है कि "जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रगति और आतंकियों की रणनीति में आए बदलाव, जो कि भारत की सामाजिक समरसता और आर्थिक समृद्धि को छिन्न-भिन्न करने पर केंद्रित है, ने भारत सरकार की यह जिम्मेदारी बढ़ा दी है कि वह आतंकी समूहों द्वारा जन संहार और आर्थिक-सामाजिक विध्वंस के हथियार के रूप में जैविक तत्वों का इस्तेमाल किए जाने पर कड़ी नजर रखे।"
संदेश में यह भी कहा गया है कि आतंकी, भारत में जैव आतंकवाद के लिए जरूरी सामग्रियों को आसानी से पा सकते हैं और जैविक हमले का अंतर्राष्ट्रीय अभियान शुरू करने के लिए भारत को एक ठिकाने के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।
राजनयिकों ने चेतावनी दी थी, "अधिक घातक और विषैले तत्व भारत में प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं और भारत का विशाल औद्योगिक आधार भी इसे जैविक आतंकवाद की सामाग्री का बड़ा स्रोत बनाने में भूमिका निभाता है।"
संदेश में कहा गया है, "किसी भी भारतीय शहर में इन तत्वों को छोड़ देने से इसका अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आसानी से फैलाव हो सकता था। अकेले दिल्ली हवाईअड्डे से कई यूरोपीय, एशियाई, मध्य पूर्वी और अफ्रीकी गंतव्यों के लिए उड़ानें जाती हैं, साथ ही शिकागो और नेवार्क के लिए सीधी उड़ाने हैं।"
संदेश में कहा गया है, "दुनिया में कहीं पर भी हमला करने की योजना बना रहे आतंकी भारत के आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी उद्योग और जैव चिकित्सा अनुसंधान से जुड़े समुदाय को जैविक तत्वों के सम्भावित स्रोत के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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