विकिलीक्स खुलासा : कश्मीर में हिरासत में प्रताड़ना

समाचार पत्र, 'गार्जियन' ने शुक्रवार को कहा है कि संदेशों में बताया गया है कि आईसीआरसी ने 2005 में दिल्ली स्थित अमेरिकी राजनयिकों को, कश्मीर में हिरासत में रखे गए सैकड़ों लोगों को बिजली का करंट लगाने, उनकी पिटाई करने और यौन उत्पीड़न किए जाने के बारे में बताया था।

अन्य संदेशों में यह बात सामने आई है कि 2007 में अमेरिकी राजनयिक भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा व्यापक तौर पर किए जा रहे मानवाधिकार उल्लंघनों के बारे में चिंतित थे। राजनयिकों ने कहा है कि भारतीय सुरक्षा बलों के लोग अपराध कबूल करवाने के लिए हिरासत में रखे लोगों को प्रताड़ित करते थे।

दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास से अप्रैल 2005 में भेजे गए एक संदेश में कहा गया था कि आईसीआरसी, भारत सरकार से निराश हो गया था, क्योंकि भारत सरकार ने हिरासत में रखे गए लोगों के साथ दुर्व्यवहार रोकने के लिए कुछ भी नहीं किया।

दूतावास ने अपने संदेश में कहा था कि आईसीआरसी ने यह निष्कर्ष निकाला था कि भारत प्रताड़ना की अनदेखी करता है और प्रताड़ना के शिकार नागरिक और आतंकी नियमित रूप से मारे जा रहे हैं।

कश्मीर में पूरे 1990 के दशक में और इस दशक के प्रारम्भ में सुरक्षा बलों के खिलाफ पाकिस्तान समर्थित इस्लामी आतंकियों और अलगाववादियों की ओर से जारी हिंसा छायी रही है।

रिपोर्ट के अनुसार इस हिंसा में हजारों की संख्या में लोग अपनी जानें गंवा चुके हैं, इनमें बड़ी संख्या में नागरिक शामिल थे।

आईसीआरसी के कर्मचारी ने अमेरिकी राजनयिकों को बताया था कि आईसीआरसी के लोगों ने जम्मू एवं कश्मीर और भारत के अन्य हिस्सों में स्थित बंदी गृहों का 2002 व 2004 के बीच 177 बार दौरा किया था और 1,491 बंदियों से मुलाकात की थी। उन्होंने 1,296 बंदियों का निजीतौर पर साक्षात्कार भी किया था।

आईसीआरसी ने कहा है कि इनमें से 852 मामलों में बंदियों ने बुरे बरताव की बात कही थी। इनमें से 171 ने पिटाई की शिकायत की और 681 ने कहा कि उन्हें प्रताड़ना के छह तरीकों में से एक या उससे अधिक तरीके से प्रताड़ित किया गया।

आईसीआरसी ने कहा है कि भारतीय सुरक्षा बल की सभी शाखाओं ने बंदियों को प्रताड़ित करने के लिए इन तरीकों का इस्तेमाल किया। आईसीआरसी ने कहा है, "मानवाधिकारों का यह उल्लंघन हमेशा अधिकारियों की उपस्थित में हुआ है। और ..प्रताड़ना के शिकार व्यक्ति किंचित ही आतंकी रहे हैं, लेकिन या तो वे आतंकवाद से जुड़े रहे हैं या फिर यह माना गया कि उन्हें आतंकवाद के बारे में जानकारी थी और ऐसे लोगों की नियमित रूप से हत्याएं भी हुईं।"

रिपोर्ट में कहा गया है कि 10 वर्ष पहले आईसीआरसी ने कहा था कि जम्मू एवं कश्मीर में कोई 300 बंदी गृह थे। लेकिन अब उनमें से कुछ ही बचे हैं। लेकिन आईसीआरसी 'कार्गो बिल्डिंग' तक कभी नहीं पहुंच पाया। 'कार्गो बिल्डिंग' श्रीनगर का सबसे बदनाम बंदी गृह रहा है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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