एक दूसरे के पूरक हैं भारत और चीन : वेन (राउंडअप इंट्रो-1)
नई दिल्ली, 15 दिसम्बर (आईएएनएस)। भारत की तीन दिवसीय यात्रा पर आए चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने बुधवार को साफ कर दिया कि दोनों देश प्रतिद्वंद्वी न होकर बल्कि सहयोगी हैं। यात्रा के पहले दिन दोनों देशों के बीच 16 अरब डॉलर के कारोबारी समझौते करने की घोषणा हुई। भारत ने चीन के समक्ष जम्मू एवं कश्मीर के लोगों को जारी नत्थी वीजा का मुद्दा भी उठाया।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुधवार रात चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ के लिए एक निजी रात्रिभोज का आयोजन किया। माना जा रहा है कि मनमोहन सिंह ने अपने चीनी समकक्ष के साथ नत्थी वीजा का महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में दोनों देश एक दूसरे के प्रतिद्वंद्वी न होकर बल्कि सहयोगी हैं।
जानकार सूत्रों ने बताया कि बहुपक्षीय शिखर सम्मेलनों दौरान कई बार मिल चुके दोनों नेताओं ने एक दूसरे को भरोसा दिलाया कि एक शक्ति के रूप में उभर रहे दोनों देश एक दूसरे के प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि एक दूसरे के पूरक हैं।
सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने चीन के समक्ष उसके द्वारा जम्मू एवं कश्मीर के लोगों को नत्थी वीजा जारी करने के मुद्दा को उठाया। प्रधानमंत्री ने जियाबाओ को याद दिलाया कि दोनों देशों को एक दूसरे की महत्वपूर्ण चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता दिखाने की जरूरत है।
मनमोहन सिंह ने चीनी प्रधानमंत्री को बताया कि जिस तरह ताइवान का मुद्दा चीन के लिए महत्वपूर्ण है, ठीक उसी तरह कश्मीर का मुद्दा भारत के लिए अहमियत रखता है।
समझा यह भी जा रहा है कि प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए चीन से समर्थन की मांग की।
विशाल व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ जियाबाओ विशेष विमान से दोपहर 1.45 बजे पालम स्थित वायु सेना स्टेशन पहुंचे। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और विदेश सचिव निरूपमा राव ने उनकी अगवानी की। पिछले पांच वर्ष में जियाबाओ की यह दूसरी भारत यात्रा है।
जियाबाओ की यह यात्रा ऐसे अहम मौके पर हो रही है जब जम्मू एवं कश्मीर के नागरिकों को अलग से जारी होने वाले नत्थी वीजा, अरूणाचल प्रदेश के प्रति चीन के हठधर्मी रुख और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में चीन द्वारा तेजी से निवेश किए जाने जैसे मसलों की वजह से दोनों देशों के रिश्तों के बीच तनाव है।
जियाबाओ ने कहा, "मेरा मौजूदा दौरा मित्रता बढ़ाने, सहयोग बढ़ाने, अपनी पुरानी उपलब्धियों पर आगे बढ़ने व दोनों देशों के सामूहिक विकास व आपसी लाभ के लिए नए दरवाजे खोलने पर केंद्रित है।"
वेन ने एक लिखित बयान में कहा, "चीन-भारत सम्बंधों के सामने बड़े अवसर हैं और व्यापक सम्भावनाएं हैं।" यह बयान दोपहर में उनके भारत पहुंचने के बाद जारी किया गया।
उनकी यात्रा के पहले दिन दोनों देशों की कम्पनियों के बीच 50 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। चीनी प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी तीन दिनों की यात्रा के दौरान कुल 16 अरब डॉलर के समझौते होंगे। दोनों देशों के बीच इस कारोबारी साल में 60 अरब डॉलर से अधिक का द्विपक्षीय व्यापार होने की संभावना है।
चीनी प्रधानमंत्री ने यहां भारत के प्रमुख कारोबारी प्रतिनिधि संगठनों द्वारा आईटीसी मौर्या होटल में आयोजित एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया में चीन और भारत दोनों के लिए काफी अवसर हैं। इसके साथ ही उन्होंने पश्चिमी देशों द्वारा दोनों देशों के बीच चीनी ड्रैगन और भारतीय हाथी के रूप में की जा रही तुलना को खारिज कर दिया।
दोनों देशों के कारोबारी दिग्गजों के बीच उन्होंने सम्मेलन में कहा कि हम अनेक क्षेत्रों में एक दूसरे को सहयोग कर सकते हैं और दुनिया में दोनों देशों के लिए विकास के अनेक अवसर मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि चीन को ड्रैगन की और भारत को हाथी की उपमा दिया जाना उचित नहीं है।
इसके अलावा चीन और भारत के बीच बढ़ते द्विपक्षीय व्यापारिक असंतुलन पर वेन जियाबाओ ने कहा कि वे चीन में भारतीय निर्यातकों के लिए अवसर बढ़ाने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि भारतीय कारोबारी सूचना प्रौद्योगिकी, फार्माश्यूटिकल उत्पाद और कृषि उत्पादों के क्षेत्र में निर्यात बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं।
गुरुवार सुबह जियाबाओ का राष्ट्रपति भवन में पारंपरिक स्वागत होगा। उसके बाद वह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ शिष्टमंडलीय स्तर की वार्ता में द्विपक्षीय एवं अंतर्राष्ट्रीय हितों पर चर्चा करेंगे। इस दौरान वे 19.2 अरब डॉलर के व्यापार घाटे के मसले को सुलझाने सहित विभिन्न व्यापारिक मसलों पर मुख्य रूप से चर्चा कर सकते हैं।
भारत, चीन के बाजारों तक भारतीय माल की पहुंच और भारत के ढांचागत क्षेत्र में चीन के व्यापक निवेश का मसला उठाएगा। दोनों नेता संयुक्त राष्ट्र सुधारों, वैश्विक वित्तीय संकट, जलवायु परिवर्तन और अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर भी चर्चा कर सकते हैं।
राजधीन के टैगोर इंटरनेशनल स्कूल में जियाबाओ ने छात्रों के समक्ष कहा कि 'भारत और चीन चिरकालिक दोस्त' हैं।
उधर, तिब्बती युवाओं ने जंतर मंतर पर चीनी प्रधानमंत्री की भारत यात्रा का विरोध किया। युवा तिब्बत की आजादी की मांग कर रहे हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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