झारखण्ड सरकार की उदासीनता झेल रहे हैं सुरक्षा अधिकारी
इन अधिकारियों का कहना है कि राज्य सरकार ने अब तक उनकी सेवा शर्तो को सूत्रित नहीं किया है। इस कारण उन्हें बीमा एवं उच्चतर वेतनमान जैसी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
अक्टूबर, 2009 में डिप्टी कमांडेंट श्रेणी के अधिकारी नक्सली प्रभावित छह जिलों में सहायक पुलिस अधीक्षक (एएसपी) के तौर पर भेजे गए थे।
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के अपूर्व, विजय कुमार और शंभू कुमार की तैनाती क्रमश: रांची, खूंटी और चाईबासा में की गई थी, जबकि सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के संजय कुमार, रोनाल्ड जौहर हांसदा एवं सैनी आलोक टिग्गा को क्रमश: गिरिडीह, पलामू और गुमला में तैनात किया गया था।
इन अधिकारियों की सेवा शर्तो को अभी तक सूत्रित नहीं किया गया है। इतना ही नहीं, नक्सली प्रभावित क्षेत्रों में तैनात इन अधिकारियों को अतिरिक्त वेतन भी नहीं दिया जा रहा है। उन्हें बीमा एवं अन्य सुविधाएं भी नहीं दी गई हैं।
रोनाल्ड जौहर हांसदा ने गुरुवार को आईएएनएस को फोन पर बताया, "अभियान के दौरान अगर हमारी मौत हो जाए तो हमारे परिवार को कौन देखेगा।"
उन्होंने कहा, "हम वरिष्ठ अधिकारियों के समझ कई बार ये मुद्दे उठा चुके हैं। हमें आश्वासन दिया गया कि सरकार इन मुद्दों पर विचार करेगी, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ।"
सीआरपीएफ अधिकारी विजय कुमार को पिछले तीन माह से वेतन नहीं मिला है।
उन्होंने कहा, "मैं इसकी वजह नहीं जानता। हमने यह मुद्दा कई बार उठाया है, लेकिन हर बार हमें कहा गया कि मुद्दे का हल एक सप्ताह में हो जाएगा।"
कुछ अधिकारियों ने यहां तक कहा कि वे अपने पुराने कैडर में लौट जाना पसंद करेंगे।
उल्लेखनीय है कि झारखण्ड के 24 में से 20 जिले नक्सली गतिविधियों से जूझ रहे हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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