बेहतर सम्बंधों के लिए मतभेद बाधा नहीं : वेन
'इंडियन काउंसिल फॉर वर्ल्ड अफेयर्स' में दिए गए अपने भाषण में वेन ने कहा, "हम दोनों बड़े और प्राचीन देश हैं, इसलिए दोनों देशों के बीच कुछ असहमति का होना स्वाभाविक बात है।"
उन्होंने कहा, "फिर भी, हमने 2,000 वर्षो से अधिक समय से एक दूसरे का सहयोग किया है। कुछ मामलों में मतभेद दोनों देशों को अच्छे सम्बंध कायम करने से नहीं रोक सकते।"
वेन ने कहा, "दोनों देशों के बीच सम्बंध विकसित हो चुके हैं और मुझे विश्वास है कि इस सम्बंध के आधार पह हम आगे अपना सहयोगात्मक सम्बंध कायम करने में सक्षम होंगे।"
चीनी प्रधानमंत्री ने वर्ष 1954 में हुए पंचशील समझौते का भी जिक्र किया। दोनों देशों के बीच हुए इस समझौते में सहअस्तित्व के पांच सिद्धांतों की स्थापना की गई है।
वेन ने उल्लेख किया कि चीन शीघ्र ही भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार होगा। उन्होंने कहा, "विश्व में आर्थिक व्यवस्था कायम करने के लिए दोनों देश जी-20 जैसे मंचों पर सहयोग करेंगे।"
उन्होंने कहा, "विश्व में बहुध्रुवीय व्यवस्था है, लेकिन विश्व में अभी भी कुछ बुरी घटनाएं हो रही हैं, जिससे दोनों देशों को चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।"
चीनी प्रधानमंत्री ने सहस्राब्दियों से अधिक समय से दोनों सभ्यताओं के बीच सांस्कृतिक सम्बंधों की जमकर प्रशंसा की।
उन्होंने कहा, "भारतीय संस्कृति ने चीन की संस्कृति को समृद्ध किया है और भारतीय संस्कृति पर चीन की संस्कृति का प्रभाव देखा जा सकता है।"
वेन ने कहा, "चीन के बुद्धिजीवी वर्ग पर रवींद्रनाथ टैगोर का खास प्रभाव है और चीन में ऐसे कई विद्वान हैं जिन्होंने भारतीय संस्कृति का अध्ययन किया है।"
उन्होंने उल्लेख किया कि भारतीय संस्कृति ने "चीन के विचारों और विश्व की विचार प्रक्रिया पर गहरा" प्रभाव छोड़ा है।
वेन ने कहा, "डॉ. द्वारकानाथ कोटणीस के योगदान का हमारी सोच पर गहरा प्रभाव है।"
उल्लेखनीय है कि कोटणीस पांच भारतीय डॉक्टरों में से एक हैं जिन्होंने वर्ष 1938 के चीन-जापान युद्ध के समय चिकित्सकीय मदद देने वहां गए थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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