भारत, चीन का लक्ष्य 100 अरब डॉलर का व्यापार (लीड-2)
दोनों एशियाई दिग्गजों ने व्यापार और निवेश को बढ़ाने और अन्य व्यापारिक मुद्दों पर सुझाव देने के लिए भारत-चीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी फोरम के गठन की भी घोषणा की है।
नई दिल्ली के दौरे पर आए चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बीच करीब एक घंटे तक चली औपचारिक वार्ता के बाद जारी बयान में कहा गया है, "विकास हेतु विश्व में भारत और चीन के लिए पर्याप्त अवसर हैं और दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग बढ़ाने के लिए पर्याप्त जगह हैं।"
बयान में कहा गया है, "दोनों पक्ष एक-दूसरे के शांतिपूर्ण विकास का स्वागत और इसे पारस्परिक मजबूती की प्रक्रिया के रूप में स्वीकार करते हैं।"
इसके अलावा दोनों देशों ने चीन में भारतीय निर्यात को बढ़ाने के लिए कदम उठाने की बात कही है। वर्तमान में द्विपक्षीय व्यापार का संतुलन चीन के पक्ष में है और चालू वित्त वर्ष में भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा बढ़कर 24 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है।
पिछले वित्त वर्ष में दोनों देशों के बीच 51 अरब डॉलर का व्यापार हुआ और इस साल इसके 60 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। वर्ष 2005 में दोनों देशों के बीच केवल 15 अरब डॉलर का व्यापार हुआ था।
लेकिन पिछले वित्त वर्ष में भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार देश चीन को द्विपक्षीय व्यापार में 19 अरब डॉलर का फायदा हुआ जबकि 2002 में यह आंकड़ा एक अरब डॉलर से भी कम था। इस कारण भारतीय पक्ष में चिंता व्यक्त की जा रही है।
दोनों पक्षों ने आधारभूत संरचना, पर्यावरण संरक्षण, सूचना प्रौद्योगिकी, दूरसंचार, निवेश और वित्त के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जाहिर की।
भारत ने सड़क, रेलवे और निर्माण क्षेत्र में चीन के निवेश का स्वागत किया।
बयान में कहा गया, "दोनों देश निवेश को बढ़ावा देने और विभिन्न व्यापारिक समझौतों पर सहयोग बढ़ाने के लिए सहमत हुए हैं। दोनों देशों ने किसी भी तरह के संरक्षणवाद का विरोध करने पर सहमति जताई।"
बयान में भारतीय रिजर्व बैंक और चीनी बैंकिंग नियामक आयोग के बीच सहयोग बढ़ाने की भी बात कही गई है।
संयुक्त बयान के मुताबिक दोनों देशों के बीच मीडिया, संस्कृति और पर्यावरण के अनुकूल प्रौद्योगिकी सहित विभिन्न क्षेत्रों में छह समझौतों पर हस्ताक्षर हुए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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