वीरभद्र को रिश्वत मामले में अदालत में उपस्थित होने से छूट
वीरभद्र सिंह और उनकी पूर्व सांसद पत्नी एक अक्टूबर को उनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल होने के बाद पहली बार गुरुवार को विशेष न्यायाधीश बी. एल. सोनी की अदालत में उपस्थित हुए, जहां उन्हें अदालत ने पुलिस चालान की कॉपी दी।
हिमाचल प्रदेश सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने उनके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है। अगली सुनवाई पांच मार्च को होगी।
वीरभ्रद सिंह ने अदालत से बाहर पत्रकारों से कहा कि (प्रेम कुमार) धूमल की अगुवाई वाली भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) सरकार ने उनसे राजनीतिक दुश्मनी निकालने के लिए उन पर आरोप लगाया है।
वीरभद्र सिंह राज्य के पांच बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं। उनपर 1989 में मुख्यमंत्री पद का दुरुपयोग करने का अरोप लगाया गया है। राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी विजय सिंह मंटोकिया द्वारा 2007 में उनके खिलाफ एक ऑडियो सीडी जारी करने के बाद उनके खिलाफ तीन अगस्त, 2009 में मामला दर्ज किया गया।
इसमें वीरभ्रद सिंह को भारतीय प्रशासनिक सेवा के एक अधिकारी महिंदर लाल, जिनका अब निधन हो चुका है, के साथ किसी पैसे की लेन-देन के बारे में बात करते सुना गया था। इसमें प्रतिभा सिंह और कुछ उद्योगपतियों की भी आवाज थी।
उनके खिलाफ दाखिल आरोप पत्र में गुजरात अंबुजा सिमेंट और बीयर निर्माता कम्पनी मोहन मीकिन लिमिटेड के मालिकों द्वारा रिश्वत दिए जाने का भी जिक्र है।
विशेष लोक अभियोजक जीवन लाल शर्मा ने आईएएनएस को बताया कि दोनों को दो शर्तो पर जमानत दी गई है। वे गवाह को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेंगे और इस तरह का अपराध दोबारा नहीं करेंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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