भारत ने परमाणु दायित्व कानून पर अमेरिका की चिंताएं मिटाईं
अमेरिकी कम्पनियों की चिंताएं दूर होने के सवाल पर दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के सहायक मंत्री राबर्ट ब्लेक ने कहा, "यह चिंताएं दूर हुई हैं।"
उन्होंने कहा, "आप साझा बयान में देखें तो भारत ने घोषणा की है कि उसने अनुपूरक मुआवजा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं और अगले वर्षो में इस समझौते में हुई प्रगति का मूल्यांकन किया जाएगा। साथ ही उन्होंने अमेरिकी कम्पनियों को समान अवसर उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।"
भारत के 150 अरब डॉलर के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र पर नजरें जमाए बैठीं अमेरिकी कम्पनियां भारत में असैन्य परमाणु दायित्व कानून पारित होने के बाद पीछे हट गई थीं। इस कानून के जरिए परमाणु सामग्री की आपूर्ति करने वाली कम्पनियों को भी दुर्घटना की स्थिति में 80 वर्ष की अवधि तक मुआवजे के लिए जिम्मेदार बनाया गया है। इस कानून से भारत-अमेरिका असैन्य नागरिक परमाणु करार के उद्देश्यों को पूरा करने में अमेरिका को झटका लगा था।
ब्लेक ने कहा, "यह क्षेत्र अमेरिका के लिए उच्च प्राथमिकता में है। न सिर्फ इसलिए कि इससे हमारी कम्पनियों को भारत में व्यापार के महत्वपूर्ण अवसर मिलेंगे, बल्कि इसलिए भी क्योंकि इससे भारत में हमारे मित्रों को अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी करने के अवसर मिलेंगे।"
उन्होंने कहा, "हम नागरिक परमाणु क्षेत्र में आगे बढ़े हैं और राष्ट्रपति के भारत दौरे के इस परिणाम से हम खुश हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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