देश में चीनी भाषा के शिक्षकों की कमी
नई दिल्ली, 15 दिसम्बर (आईएएनएस)। चीन के साथ बढ़ते रिश्तों के कारण देश में जहां मैंडरिन (चीन की भाषा) के शिक्षकों की मांग बढ़ती जा रही है, वहीं कड़े वीसा नियमों ने चीन के शिक्षकों का देश में आना कठिन बना दिया है।
गौरतलब है कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) अगले साल से अपने साथ जुड़े हुए करीब 11,000 विद्यालयों में छठी कक्षा से मैंडरिन भाषा शुरू करने जा रहा है।
चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ की बुधवार से शुरू हुई भारत यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच रिश्ता और प्रगाढ़ होने की संभावना है। ऐसे में चीनी भाषा के शिक्षकों की मांग और बढ़ेगी।
दिल्ली विश्वविद्यालय में पूर्वी एशियाई अध्ययन विभाग की प्रमुख मधु भल्ला ने कहा कि पिछले कुछ सालों में विभाग में आने वाले चीनी शिक्षकों को वीसा देने से इंकार किया जाता रहा है। यदि सरकार सीबीएसई स्तर पर चीनी भाषा को शुरू करना चाहती है, तो उसे इस नीति में बदलाव करना होगा।
भल्ला ने कहा कि अभी विभाग में चीन के एक भी शिक्षक नहीं हैं। चीनी भाषा में आवाज का काफी महत्व है। ऐसे में चीनी शिक्षक या ऐसे शिक्षक जो चीन में रह चुके हैं, प्रशिक्षण प्रक्रिया के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं।
देश में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल में विश्व भारती विश्वविद्यालय चीनी भाषा की शिक्षा देने वाले कुछ प्रमुख संस्थान हैं।
शिक्षा वेबसाइट आस्कएडू डॉट कॉम के मुताबिक देश में कुल लगभग 37 संस्थानों में चीनी भाषा पढ़ाई जाती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications