भारत, चीन के बगैर बाध्यकारी वादे नहीं करेगा अमेरिका
अरुण कुमार
वाशिंगटन, 15 दिसम्बर (आईएएनएस)। अमेरिका ने कानकुन में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में भारत द्वारा निभाई गई रचनात्मक भूमिका की सराहना की है और कहा है कि जब तक भारत और चीन जैसे देश, कानूनी बाध्यता के वादे नहीं करते, तब तक अमेरिका भी ऐसा नहीं करेगा।
जलवायु परिवर्तन पर अमेरिका के विशेष दूत टोड स्टर्न ने मंगलवार को संवाददाताओं को बताया, "यह काफी नहीं है कि फिलहाल हम चीन या भारत से कानूनी रूप से बाध्यकारी वादे करने के लिए कह रहे हैं।" टोड ने कानकुन में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था।
टोड ने कहा, "हमारा कहना यह है कि हम कानूनी रूप से बाध्यकारी वादे तभी करेंगे, जब उभरती अर्थव्यवस्था वाले देश भी ऐसा करेंगे। यदि वे ऐसा करने के लिए तैयार नहीं हैं, तो यह काफी नहीं है कि हम इसकी आलोचना करें।"
अमेरिका का चीन से इस बात को लेकर विरोध है कि उसे अपने उत्सर्जन में बड़ी मात्रा में कमी करनी चाहिए। स्टर्न ने कहा, "लेकिन चीन या अन्य विकासशील देश इस समय उत्सर्जन में सापेक्ष कटौती की बात कर रहे हैं।"
कानकुन व मेक्सिको में भारत की भूमिका के बारे में स्टर्न ने कहा कि भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों के प्रति विश्वसनीय रहते हुए भी कठिन मुद्दों के समाधान के लिए एक रचनात्मक भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा, "मैं समझता हूं कि भारत ने कानकुन में खासतौर से रचनात्मक भूमिका निभाई है।"
स्टर्न ने कहा, "मैं समझता हूं कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों के प्रति बहुत अधिक विश्वसनीय था और जी-77 में अपनी भूमिका के प्रति भी विश्वसनीय था, लेकिन इसके बावजूद वह बातचीत में कठिन मुद्दों के ऐसे रचनात्मक समाधान की तलाश में था, जिससे विकासशील और विकसित दोनों देशों के हित सध जाएं।"
स्टर्न ने कहा, "वाकई में भारत ने हर किसी को बातचीत की मेज पर लाने वाला समाधान तलाशने की कोशिश में खासतौर से एक रचनात्मक भूमिका निभाई है। और पारदर्शिता के मुद्दे पर उसका एक अच्छा उदाहरण है, जो कि बहुत महत्वपूर्ण है।"
स्टर्न ने कहा, "एक दिन ऐसा आएगा जब सभी देश एक कानूनी ढांचे में एकसाथ शामिल होंगे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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