मंत्रिमंडल समूह 22 दिसम्बर को डीजल कीमतों पर फैसला करेगा
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, "जहां तक पेट्रोल की कीमतों का सवाल है तो सरकार ने इस क्षेत्र को नियंत्रण मुक्त कर दिया है। तेल विपणन कम्पनियों के घाटे को कम करने के लिए हमने डीजल की कीमतों में भी वृद्धि करने की मांग की है।"
पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारी ने कहा, "डीजल कीमतों पर फैसले के लिए अधिकार प्राप्त मंत्रिमंडलीय समूह की बैठक 22 दिसम्बर को होगी। हमने कहा है कि तेल विपणन कम्पनियों को डीजल पर 5.4 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। इसके मुताबिक फैसला लिया जाएगा।"
इससे पहले इंडियन ऑयल कार्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने पेट्रोल की कीमतों में तीन रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की है।
इससे पहले सरकार ने 25 जून को ईंधन की कीमतों में वृद्धि की थी। 25 जून को ही सरकार ने पेट्रोल की कीमतों को नियंत्रण मुक्त कर दिया था और पेट्रोल की कीमत 3.5 रुपये प्रति लीटर, डीजल की कीमत 3.5 रुपये प्रति लीटर, केरोसीन कीमत तीन रुपये लीटर और रसोई गैस की कीमत 35 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ाई गई थी।
वामपंथी दलों ने पहले ही चेतावनी दी है कि सरकार यदि ईंधन की कीमतें बढ़ाएगी तो वह विरोध करेंगे। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के पोलित ब्यूरो के सदस्य बिमान बोस ने कहा कि वह सरकार के इस 'जन विरोधी' फैसले का विरोध करेंगे।
जून में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 79 डॉलर प्रति बैरल थी जो कि अब बढ़कर 90 डॉलर प्रति बैरल हो गई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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