जियाबाओ भारत पहुंचे, महत्वपूर्ण कारोबारी सौदों के आसार (लीड-2)
विशाल व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ जियाबाओ विशेष विमान से दोपहर 1.45 बजे पालम स्थित वायु सेना स्टेशन पहुंचे। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और विदेश सचिव निरूपमा राव ने उनकी अगवानी की। पिछले पांच वर्ष में जियाबाओ की यह दूसरी भारत यात्रा है।
नई दिल्ली पहुंचते ही जियाबाओ टैगोर इंटरनेशनल स्कूल रवाना हो गए जहां वह स्कूली बच्चों से बातचीत करेंगे और उन्हें चीन की संस्कृति, ताई-ची और लेखन के बारे में बताएंगे।
जियाबाओ की यह यात्रा ऐसे अहम मौके पर हो रही है जब जम्मू एवं कश्मीर के नागरिकों को अलग से जारी होने वाले नत्थी वीजा, अरूणाचल प्रदेश के प्रति चीन के हठधर्मी रुख और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में चीन द्वारा तेजी से निवेश किए जाने जैसे मसलों की वजह से दोनों देशों के रिश्तों के बीच तनाव है।
बुधवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के आवास पर होने वाले रात्रिभोज में सिंह ये मसले जियाबाओ के समक्ष उठा सकते हैं।
दोनों नेताओं ने बहुराष्ट्रीय शिखर बैठकों के दौरान कई बार मुलाकात की है। रात्रिभोज में अन्य विशिष्ट मेहमानों के साथ शरीक होने से पूर्व वे दोनों अलग से बैठक कर इन मसलों पर आधा घंटे तक चर्चा कर सकते हैं।
गुरुवार सुबह जियाबाओ का राष्ट्रपति भवन में रस्मी स्वागत होगा। उसके बाद वह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ शिष्टमंडलीय स्तर की वार्ता में द्विपक्षीय एवं अंतर्राष्ट्रीय हितों पर चर्चा करेंगे। इस दौरान वे 19.2 अरब डॉलर के व्यापार घाटे के मसले को सुलझाने सहित विभिन्न व्यापारिक मसलों पर मुख्य रूप से चर्चा कर सकते हैं।
भारत, चीन के बाजारों तक भारतीय माल की पहुंच और भारत के ढांचागत क्षेत्र में चीन के व्यापक निवेश का मसला उठाएगा।
दोनों नेता संयुक्त राष्ट्र सुधारों, वैश्विक वित्तीय संकट, जलवायु परिवर्तन और अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर भी चर्चा कर सकते हैं।
जियाबाओ की इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच करीब 20 अरब डॉलर के कारोबारी सौदे हो सकते हैं और दोनों देशों के बैंकों और वित्तीय संस्थाओं में बैंकिंग एवं निवेश से जुड़े करीब 45 सहमति ज्ञापनों पर हस्ताक्षर हो सकते हैं।
दोनों देश मुख्य कार्यकारी अधिकारियों का एक मंच भी गठित कर सकते हैं। इससे उनके कारोबार को बढ़ाकर 60 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।
जियाबाओ भारत-चीन के कूटनीतिक रिश्तों के 60 वर्ष पूरे होने के मौके पर आयोजित समारोहों में भी शिरकत करेंगे। भारत से वह पाकिस्तान की यात्रा पर जाएंगे।
इससे पहले चीन के सहायक विदेश मंत्री ने सोमवार को कहा था, "चीन-भारत के सम्बंध महत्वपूर्ण हैं। दोनों देशों के नेताओं में इस बात पर सहमति है कि विश्व में दोनों उबरती अर्थव्यवस्थाओं के विकास के लिए पर्याप्त अवसर हैं।"
हू ने उम्मीद व्यक्त की कि जियाबाओ की इस यात्रा से व्यापार और अर्थव्यवस्था में द्विपक्षीय सम्बंधों में मजबूती आएगी और दोनों देशों में राजनीतिक विश्वास और समझदारी बढ़ेगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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