'तमिल राजाओं की प्रतिमाएं नष्ट कर रहा है श्रीलंका'
गुरमुख सिंह
टोरंटो, 15 दिसम्बर (आईएएनएस)। श्रीलंका में राष्ट्रीय गान का तमिल संस्करण हटाने का फैसला आने के बाद कनाडा में रहने वाले श्रीलंकाई तमिल मूल के लोग नाराज हैं और उन्होंने आरोप लगाया है कि श्रीलंका सरकार तमिल राजाओं की प्रतिमाओं को जानबूझकर नष्ट कर रही है।
गौरतलब है कि हाल ही में राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के नेतृत्व में श्रीलंकाई मंत्रिमंडल ने तय किया था कि अब किसी भी आधिकारिक या राष्ट्रीय समारोह में राष्ट्र गान का तमिल संस्करण 'श्रीलंका माता' नहीं बजाया जाएगा।
कनाडाई तमिल कांग्रेस ने मंगलवार को एक वक्तव्य जारी कर कहा, "इस फैसले से स्पष्ट है कि उस देश में तमिलों के लिए कोई स्थान नहीं है और इससे यह भी साबित हो गया है कि श्रीलंका के सत्तारूढ़ शासन का उद्देश्य उस देश को सिंहल बौद्ध राष्ट्र बनाना है। हम लम्बे समय से श्रीलंका की इस मंशा के विषय में बताते रहे हैं।"
कनाडाई तमिल कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता डेविड पूपालापिल्लई ने कहा, "उनका निर्णय हमारे लिए चौंकाने वाला नहीं था। हम चाहते हैं कि भारत सहित अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इस पर गौर करे और हमें स्वतंत्रता दिलाने व श्रीलंकाई उपमहाद्वीप मे सिंहली लोगों की तरह स्वतंत्र नागरिक के रूप में जीवन बिताने का अधिकार दिलाने में मदद करे।"
उन्होंने कहा कि तमिलों के नरसंहार के बाद राजपक्षे सरकार श्रीलंका को सिंहल देश बनाने की दिशा में तमिल पहचान के सभी प्रतीकों को नष्ट करने पर उतारू है।
उन्होंने कहा कि जब तक श्रीलंका में राजपक्षे सरकार सत्तारूढ़ है तब तक तमिलों को न्याय नहीं मिलेगा।
पूपालापिल्लई ने आरोप लगाया, "श्रीलंकाई सरकार 18वीं शताब्दी में शासन करने वाले तमिल राजाओं की प्रतिमाएं भी जानबूझकर नष्ट कर रही है। यह सरकार तमिल संस्कृति की सभी निशानियां मिटा देना चाहती है।"
कनाडा में 300,000 से ज्यादा श्रीलंकाई तमिल हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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