'ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में 10 प्रतिशत की कमी सम्भव'

'आईसीटी कांट्रीब्यूशन टू इंडियाज नेशनल एक्शन प्लान ऑन क्लाइमेट चेंज' (एनएपीसीसी) नाम से आई इस रिपोर्ट के मुताबिक निर्माण क्षेत्र (42 प्रतिशत), सड़क परिवहन (30 प्रतिशत) और विद्युत क्षेत्र (16 प्रतिशत) में कार्बन डाईऑक्साइड के उत्सर्जन में कमी लाई जा सकती है।

वर्ष 2008 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एनएपीसीसी की रिपोर्ट जारी की थी। इस रिपोर्ट में ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन नियंत्रित करने की राष्ट्रीय रणनीति पेश की गई थी।

'डिजिटल एनर्जी सोल्यूशंस कॉर्न्‍सोटियम इंडिया' (डीईएससी) और 'सीआईआई-आईसीटी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर ससटेनेबल डेवलपमेंट' द्वारा पेश की गई रिपोर्ट में आईसीटी समाधान के जरिए ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम करने के लिए तीन मिशन पेश किए गए। ये मिशन हैं, ऊर्जा दक्षता बढ़ाने का राष्ट्रीय मिशन (एनएमईईई), स्थायी निवास का राष्ट्रीय मिशन (एनएमएसएच) और राष्ट्रीय सौर मिशन (एनएसएम)।

एनएमईईई ने 2015 तक कार्बन डाईऑक्साइड के उत्सर्जन में 10 करोड़ टन की कमी का लक्ष्य निर्धारित किया है। इमारतों, परिवहन और नौ अन्य क्षेत्रों में आईसीटी समाधानों को अपनाने से ही कार्बन डाईऑक्साइड के उत्सर्जन में 3.1 करोड़ टन की कमी आ सकती है जो 2015 के तय लक्ष्य की 30 प्रतिशत है।

डीईएससी के अध्यक्ष राहुल बेदी कहते हैं, "भारत में अब तक आईसीटी समाधानों के इस्तेमाल से ऊर्जा बचत की सम्भावना पर कोई रिपोर्ट नहीं आई थी। इस रिपोर्ट के बाद उद्योग अपनी ऊर्जा क्षमता का आकलन और आईसीटी आधारित समाधानों को अपनाकर मौद्रिक बचत कर सकते हैं।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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