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खान-पान से हो सकती है मानसिक बीमारियों की शुरुआत

By Super
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जर्नल 'न्यूट्रीशनल न्यूरोसाइंस' के मुताबिक पर्डयू विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान के सहायक प्रोफेसर जोसफ गार्नर ने चूहों को शर्करा की उच्च मात्रा वाली खुराक और ट्रिप्टोफेन दिया था। बालों का असामान्य रूप से झड़ना रोकने के लिए ट्रिप्टोफेन दिया जाता है।

अध्ययन में देखा गया कि पहले से बीमार चूहों ने तो खुद को खंरोचना-नोचना शुरू कर दिया जबकि स्वस्थ दिखने वाले चूहों में भी ऐसा ही असामान्य व्यवहार देखा गया।

गार्नर कहते हैं कि इन चूहों के बारे में अनुमान लगाया गया था कि यह खुराक लेने के बाद या तो वे खुद को खंरोचेंगे या अपने बाल खींचेंगे और बाद में ऐसा ही देखा गया।

गार्नर 'ट्रिचोटिलोमेनिया' का अध्ययन कर रहे थे। इस विकृति से ग्रस्त लोग अपने बाल खींचते हैं। महिलाओं में यह बीमारी ज्यादा होती है।

जो चूहे अपने बाल खींच रहे थे उनके मस्तिष्क में सीरोटोनिन की सक्रियता कम थी। सीरोटोनिन एक प्रकार का न्यूरोट्रांस्मीटर (रसायन) है जो मनोदशा को प्रभावित करता है। यह एमीनो एसिड ट्रिप्टोफेन से बना होता है जो आपके खान-पान से मिलता है।

गार्नर का मानना है कि दिमाग में सीरोटोनिन की सक्रियता बढ़ने पर विकृति के लक्षण कम हो सकते हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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