सर्वोच्च न्यायालय ने विलासराव देशमुख की खिंचाई की
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति जी.एस.सिंघवी और न्यायमूर्ति ए.के.गांगुली की पीठ ने अपने फैसले में कहा, "राज्य में साहूकारी नियमन अधिनियम-1946 के क्रियान्वयन में हस्तक्षेप करने का मुख्यमंत्री को कोई अधिकार नहीं है।"
राज्य की याचिका खारिज करते हुए अदालत ने राज्य सरकार पर 10 लाख रुपये का हर्जाना लगाया। यह धनराधि गरीब वादियों की मदद हेतु महाराष्ट्र राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण में जमा कराई जाएगी।
पूर्व मुख्यमंत्री देशमुख को सर्वोच्च न्यायालय की नाराजगी का सामना इसलिए करना पड़ा, क्योंकि उन्होंने कांग्रेसी विधायक दिलीप कुमार सानंदा के एक रिश्तेदार के खिलाफ किसानों की शिकायत पर कार्रवाई करने से प्रशासन और पुलिस को रोक दिया था। कांग्रेस विधायक का रिश्तेदार साहूकारी की गतिविधियों में लिप्त था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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