'गंगा को प्रदूषित करने वाली इकाइयों के विरूद्घ कार्रवाई'

रमेश ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि 26 उद्योगों में से सात इकाइयां बंद पाई गई जबकि दो इकाइयां निस्तारण मानकों का अनुपालन कर रहीं थीं। उनके मुताबिक नौ इकाइयों को हल्के-फुल्के सुधारों की आवश्यकता थी और आठ इकाइयां बहिस्राव निस्तारण के लिए मानदंडों का उल्लंघन करती पाई गई।

उन्होंने कहा कि मानदंडों का उल्लंघन करने वाली आठ इकाइयों में से चार इकाइयों को बंद करने के निर्देश दिए गए, तीन इकाइयों को निर्धारित निस्तारण मानकों का अनुपालन कर उपचारात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए और एक ईकाई को बंद करने के संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।

स्वच्छ गंगा सुनिश्चिचत करने के लिए मंत्रालय द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि फरवरी 2009 में राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण की स्थापना की गई। इसे नदी बेसिन के प्रति एक व्यापक ²ष्टिकोण अपनाकर गंगा नदी के संरक्षण और प्रदूषण के प्रभावी उपशमन को सुनिश्चित करने के लिए एक अधिकार संपन्न प्राधिकरण के रूप में गठित किया गया है।

रमेश ने बताया कि प्राधिकरण यह सुनिश्चित करेगा कि वर्ष 2020 तक अशोधित शहरी सीवेज अथवा औद्योगिक बहिस्राव गंगा में नहीं हो। सात भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों के संघ द्वारा एक विस्तृत नदी बेसिन प्रबंधन योजना तैयार की जा रही है और उसके आधार पर राज्यों द्वारा विश्व बैंक के ऋण की तर्ज पर राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण के वित्त पोषण हेतु गंगा के अति प्रदूषित स्थलों एवं मुख्य कस्बों और मुख्य सहायक नदियों पर नई परियोजनाएं शुरू करने हेतु विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करेंगे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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