'नीरा के ख़िलाफ़ शिकायत की प्रति दें'

सरकार ने कहा है कि उसे नीरा राडिया पर कर चोरी और विदेशी ख़ुफ़िया एजेंसियों के लिए जासूसी करने का शक है
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह उस शिकायत की प्रति अदालत में जमा करें जिसके आधार पर कॉर्पोरेट दलाल नीरा राडिया की बातचीत टेप करना शुरु किया गया.
सुप्रीम कोर्ट के दो न्यायाधीशों जीएस सिंघवी और एके गांगुली के एक पीठ ने कहा, "अटॉर्नी जनरल इस शिकायत की प्रति एक सीलबंद लिफ़ाफ़े में अदालत में जमा करवाएँ."
नीरा राडिया की बातचीत के जो हिस्से लीक हुए हैं और मीडिया में प्रकाशित हुए हैं उसमें राजनीतिज्ञों, उद्योग व्यवसाय की कई प्रमुख हस्तियों और पत्रकारों से उनकी बातचीत शामिल है.
प्रकाशित विवरणों में से एक नीरा राडिया और टाटा उद्योग समूह के प्रमुख रतन टाटा के बीच हुई बातचीत भी है. रतन टाटा ने इसके ख़िलाफ़ याचिका दायर करके कहा है कि सुप्रीम कोर्ट को इस सामग्री के प्रकाशन पर रोक लगानी चाहिए क्योंकि इससे उनकी निजता यानी प्राइवेसी का हनन होता है.
इस याचिका का जवाब देते हुए पिछले हफ़्ते सरकार ने अपने हलफ़नामे में कहा था कि नीरा राडिया के ख़िलाफ़ वर्ष 2007 में ये शिकायत मिली थी कि उन्होंने नौ साल के अल्पकाल में 300 करोड़ रुपए की कंपनी खड़ी कर ली.
सरकार ने कहा था कि उन पर विदेशी ख़ुफ़िया एजेंसी की एजेंट होने और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का भी शक था.
सोमवार को इस मामले पर हुई संक्षिप्त सुनवाई के बाद अदालत ने रतन टाटा से कहा है कि अगर वे चाहें तो जनवरी के पहले हफ़्ते तक एक और हलफ़नामा दायर कर सकते हैं.
इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने नीरा राडिया की बातचीत प्रकाशित करने वाली दो पत्रिकाओं 'आउटलुक' और 'ओपन' को तीन हफ़्तों के भीतर जवाब पेश करने को कहा है.
इन दोनों पत्रिकाओं की ओर से अदालत में उपस्थित हुए अनिल दीवान और राजीव धवन ने रतन टाटा की याचिका पर ही सवाल उठाते हुए कहा कि यह याचिका जनहित में नहीं है बल्कि यह ख़ुद रतन टाटा की निजता की रक्षा करने के लिए है.
इस मामले की अगली सुनवाई दो फ़रवरी को होगी.


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