नीरा यादव को मिली ज़मानत

नीरा यादव को मिली ज़मानत

नीरा यादव उत्तर प्रदेश के उन तीन आईएस अफ़सरों में से एक हैं,जिन्हें आईएएस एसोशिएशन ने गुप्त मतदान के ज़रिये महाभ्रष्ट का ख़िताब दिया था

इलाहबाद हाई कोर्ट ने नोएडा भूमि घोटाले के मामले में दोषी पाए गईं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्य सचिव नीरा यादव और उद्योगपति अशोक चतुर्वेदी को ज़मानत दे दी है.

पिछले हफ़्ते सीबीआई की विशेष अदालत ने इन्हें चार साल क़ैद और पचास-पचास हज़ार रुपए जुर्मानें की सज़ा सुनाई थी.

इस फैसले के ख़िलाफ़ नीरा यादव और अशोक चतुर्वेदी ने इलाहबाद हाईकोर्ट में ज़मानत की याचिका डाली थी जिसे न्यायाधीश विनोद प्रसाद की अदालत ने स्वीकार कर लिया.

अदालत ने नीरा यादव को नियमों का उल्लंघन कर फ़लेक्स इंडस्ट्रीज़,अपने परिवार के लोगों और कई महत्वपूर्ण नेताओं, अफ़सरों, जजों और उनके रिश्तेदारों को ग़लत ढंग से नोएडा के प्लॉट आवंटित करने का दोषी पाया था.

नीरा यादव रिटायर्ड आईएएस अफसर हैं, जबकि चतुर्वेदी फ़्लेक्स इंडस्ट्रीज़ के चेयरमैन.

यह घोटाला 1994-95 में उस समय हुआ जब नीरा यादव नोएडा प्राधिकरण की अध्यक्ष थीं.

उपकृत लोगों में भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी, मुख्यमंत्री मायावती, कई आईएएस अफ़सर, जज और उनके रिश्तेदार शामिल बताए जाते हैं. नीरा यादव ने स्वयं अपने और दो बेटियों के नाम भी ग़लत ढंग से प्लाट आवंटित किए.

इससे पहले हाई कोर्ट के फैसले के तहत इन दोनों को तुरंत हिरासत में लेकर उच्च सुरक्षा वाली दसना जेल भेज दिया गया था.

सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा उद्यमी एसोशिएशन की याचिका पर सीबीआई को मामले की जांच का आदेश दिया था. सीबीआई ने वर्ष 2002 में चार्जशीट दाखिल कर दी थी.बाद में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने उसी वर्ष उन्हें मुख्य सचिव बना दिया.

पत्रकार शरत प्रधान की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें मुख्य सचिव पद से हटाने का आदेश दिया.इसके बाद वह राजस्व परिषद और सतर्कता आयोग की अध्यक्ष रहीं.

उन्होंने वर्ष 2008 में सेवा से स्वैछिक त्यागपत्र देकर अवकाश ग्रहण कर लिया और 2009 के लोक सभा चुनाव से पहले वह अपने पति महेंद्र सिंह यादव के साथ भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गयीं.

महेंद्र सिंह यादव रिटार्ड आईपीएस अफसर हैं. सेवा से त्यागपत्र देकर वह भाजपा उम्मीदवार के रूप में विधायक चुने गए थे.

नीरा यादव उत्तर प्रदेश के उन तीन आईएस अफ़सरों में से एक हैं, जिन्हें आईएएस एसोशिएशन ने गुप्त मतदान के ज़रिये महाभ्रष्ट का ख़िताब दिया था, लेकिन सभी दलों के शीर्ष नेताओं और कई जजों से अपने निकट संबंधों के चलते वह महत्वपूर्ण पद पाती रहीं और सज़ा से बचती रहीं.

मगर जानकार लोगों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में अभी कई और अफ़सर हैं , जिनके ख़िलाफ़ चार्जशीट होने के बावजूद मुक़दमा शुरू भी नही हो सका क्योंकि सरकार ने उनकी फ़ाइलें दबा रखी हैं.

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+