पंचायत: तीसरे चरण में 69 फ़ीसदी मतदान

सलमान रावी
बीबीसी संवाददाता, रायपुर
अब तक पंचायत चुनाव में लोग उत्साह के साथ मतदान करते दिखे हैं
झारखंड में पंचायत के तीसरे चरण के चुनाव में छिटपुट हिंसा के बीच 69.62 प्रतिशत मतदान हुआ है.
नक्सलियों के बहिष्कार के मद्देनज़र मतदान सुबह सात बजे से ही शुरू हो गया था और दोपहर तीन बजे तक मत डाले गए.
तीसरे चरण में झारखंड के 24 में से 20 ज़िलों में 61 ब्लाक की 999 पंचायतों के 9914 बूथों पर मतदान हुआ.
इसमें ख़ास तौर पर नक्सली हिंसा का केंद्र माने जाने वाले पूर्वी और पश्चिमी सिंहभूम ज़िलों के अलावा रांची, गुमला, गिरिडीह, पलामू, चतरा, गढ़वा, लातेहार, लोहरदग्गा और संथाल परगना के नक्सलवाद प्रभावित इलाके शामिल हैं.
इस चरण के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतज़ाम किए गए थे.
सुबह मतदान जैसे ही शुरू हुआ संदिग्ध माओवादियों ने पश्चिमी सिंहभूम ज़िले के बंदगाँव प्रखंड के पारंगीर के इलाक़े में एक बूथ पर गोलियां चलाईं.
यह घटना तब घाटी जब मतदाता अपना मत डालने के लिए लाइन में खड़े हुए थे.
ज़िले के पुलिस अधीक्षक एके सिंह का कहना है कि सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई के बाद हथियारबंद माओवादी वहां से भाग निकले. झारखण्ड में पांच चरणों में पंचायत के चुनाव कराये जा रहे हैं. पहले दो चरणों में मतदाताओं का काफ़ी रुझान देखा गया था. तीसरे चरण मतदाताओं में पिछले दोनों चरणों से भी ज़्यादा जोश देखा गया. चुनाव कवर कर रहे पत्रकारों का कहना है कि ख़ास तौर पर सराइकेला खरसावाँ, गुमला, चतरा, धनबाद, पलामू, लातेहार और गढ़वा जैसे संवेदनशील ज़िलों में मतदाताओं ने सुबह से ही मतदान केंद्रों पर लाइन लगानी शुरू कर दी थी. राज्य के चुनाव आयोग के आंकड़े बताते हैं कि सुबह 11 बजे तक नक्सल प्रभावित गिरिडीह और चतरा ज़िलों में 18 प्रतिशत और गढ़वा में 16 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया.
आंकड़े बताते हैं कि सबसे ज़्यादा 77 प्रतिशत मतदान नक्सल प्रभावित सराइकेला खरसावाँ ज़िले में दर्ज किया गया जबकि धनबाद में 76.5, देवघर में 76, हजारीबाग में 71, गढ़वा में 70 .6 और पलामू में 70 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है.
राज्य के चुनाव आयोग के एक अधिकारी का कहना है कि मतदान का रुझान बताता है कि माओवादियों के बहिष्कार का मतदान पर कोई असर नहीं पड़ा है.
वैसे यह भी कहा जा रहा है कि इस बार पंचायत चुनाव में माओवादी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से शामिल हो रहे हैं, पिछले दो चरणों में 3000 ऐसे उम्मीदवार हैं जिन्हें निर्विरोध चुन लिया गया है.
कहा जा रहा है इनमें से बहुत सारे नक्सली कमांडरों के रिश्तेदार हैं या फिर उसी पृष्ठभूमि से ताल्लुक़ रखते हैं. केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम नें हाल ही में दिल्ली में आयोजित एक सेमिनार में कहा था कि अगर माओवादी या उनके रिश्तेदार चुनाव लड़ रहे हैं तो इसमें हर्ज ही क्या है.


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