पर्यावरणविदों को नहीं भाया कानकुन समझौता

संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन में 193 देशों के बीच शनिवार को कानकुन समझौते पर सहमति बनी। समझौते के इस मसौदे में इस बात का जिक्र नहीं है कि क्योटो प्रोटोकाल का वर्ष समाप्त हो जाने के बाद विकसित देश कितनी मात्रा में कार्बन उत्सर्जन में कटौती करेंगे।

समझौते में कहा गया है कि विकासशील देशों को वर्ष 2020 तक कार्बन उत्सर्जन में रोक के लिए 'राष्ट्रीय स्तर पर उचित कार्रवाई' करनी होगी। इसलिए इन देशों को विकसित देशों के समान लक्ष्य निर्धारित कटौती करने की जरूरत नहीं है।

वहीं, पर्वावरणविदों का कहना है कि यह समझौता अप्रभावशाली है।

विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र के उप निदेशक चंद्र भूषण ने कहा, "जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए यह समझौता उपयुक्त नहीं है। इसमें वर्ष 2050 के लिए वैश्विक उत्सर्जन में कमी का लक्ष्य नहीं है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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