जेपीसी की भेंट चढ़ा संसद का शीतकालीन सत्र (राउंडअप)

सत्र के अंतिम दिन सोमवार को कुछ जरूरी कामकाज निपटाने के बाद दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।

शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन की शुरुआत वर्ष 2001 में संसद भवन पर हुए आतंकी हमले की नौवीं बरसी के मौके पर शहीदों को श्रद्धांजलि दिए जाने के साथ शुरू हुई। श्रद्धांजलि के लिए कुछ समय तक शांत रहे सांसद जेपीसी की मांग को लेकर हंगामा करने लगे।

लोकसभा की कार्यवाही जैसे ही 11 बजे शुरू हुई, अध्यक्ष मीरा कुमार ने 13 दिसम्बर वर्ष 2001 को संसद पर हुए आतंकवादी हमलों के दौरान शहीद हुए पांच पुलिसकर्मियों, अर्धसैनिक बल के एक जवान और संसद के दो सुरक्षाकर्मियों को श्रद्धांजलि दी गई।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, "आतंकवादी हमले के दौरान बहादुर सुरक्षाकर्मियों ने अपना बलिदान दिया।" उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर लड़े जाने की जरूरत है।

शहीदों को श्रद्धांजलि देने के बाद मीरा कुमार ने सदन में जैसे ही प्रश्नकाल शुरू करने को कहा विपक्षी सदस्यों ने फिर हंगामा शुरू कर दिया और वे उनके आसन के करीब आकर नारेबाजी करने लगे। सदस्यों के इस रुख को देखते हुए मीरा ने इस बार उनसे बैठने का आग्रह नहीं किया, बल्कि बहुत देर तक उन्हें चुपचाप देखती रहीं। सत्तापक्ष के सांसद भी चुपचाप विरोध को देखते रहे।

लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने अध्यक्ष से सदन की कार्यवाही स्थगित करने के लिए कहा लेकिन मीरा कुमार ने उनकी तरफ नहीं देखा। बाद में उन्होंने कार्यवाही को दोपहर तक के लिए स्थगित कर दिया।

दोपहर में जैसे ही कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सदस्यों ने फिर हंगामा शुरू कर दिया जिसके बाद अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही को अनिश्तिकाल के लिए स्थगित कर दिया।

उल्लेखनीय है कि इस सत्र के दौरान विपक्षी सदस्यों के हंगामे के चलते कोई महत्वपूर्ण विधायी कार्य नहीं हो पाया।

राज्यसभा में भी शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सदस्यों के हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही को पहले दोपहर तक के लिए और फिर अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया।

उधर, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने संसद की कार्यवाही न चलने देने के लिए भाजपा की कड़ी आलोचना की। उन्होंने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर दोहरा मापदंड अपनाने के लिए भी भाजपा की आलोचना की।

संसद के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन पार्टी के संसदीय दल की बैठक को सम्बोधित करते हुए गांधी ने पूरे शीतकालीन सत्र को अवरुद्ध करने के लिए विपक्ष को, खासतौर से भाजपा को जिम्मेदार ठहराया और भरोसा दिलाया कि सरकार 2जी स्पेक्ट्रम विवाद के तह तक जाने के लिए प्रतिबद्ध है।

सोनिया ने कहा, "विपक्ष ने, खासतौर से मुख्य विपक्षी पार्टी ने जिस तरीके से सत्र के हर दिन व्यवधान पैदा किया, देश के लोग इस पर गम्भीरता से विचार करेंगे, तभी उनके साथ न्याय हो पाएगा।"

गांधी ने कहा, "वर्ष 2004 में जब से भाजपा सत्ता से बाहर हुई है, तभी से उसने यह तरीका अपनाया है। 14वीं लोकसभा के पहले सत्र से लेकर मौजूदा सत्र तक, हर सत्र में कई दिनों तक व्यवधान पैदा किया गया है। लिहाजा जरूरी सरकारी कामकाज को सम्पन्न कराने के लिए एक बड़ा प्रयास जरूरी हो गया है।"

उन्होंने कहा कि सरकार ने जेपीसी जांच को लेकर पैदा हुए गतिरोध को दूर करने के लिए लोक लेखा समिति (पीएसी) को काम में मदद देने के लिए एक मल्टी डिसीप्लीनरी एजेंसी को जोड़ने का प्रस्ताव रखा, लेकिन विपक्ष ने इसे खारिज कर दिया।

संप्रग अध्यक्ष ने कहा, "हमारी चिंता सिर्फ इस बात को लेकर है कि हमें पीएसी और सीबीआई (केंद्रीय जांच ब्यूरो) जैसी स्थापित संस्थाओं को कमजोर नहीं करना चाहिए। हमें ऐसा भी कुछ नहीं करना चाहिए जिससे प्रधानमंत्री का पद अपमानित हो। हम राजनीतिक स्वार्थ की वेदी पर इन संस्थाओं की बलि नहीं चढ़ा सकते।"

भ्रष्टाचार पर चिंता जाहिर करते हुए गांधी ने कहा कि राजनीतिक पार्टियों को इस समस्या पर लगाम लगाने के लिए कोई प्रक्रिया तैयार करनी चाहिए।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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