पन्ना राष्ट्रीय उद्यान में शावकों के साथ नजर आई बाघिन
आधिकारिक तौर पर मिली जानकारी के मुताबिक कान्हा राष्ट्रीय उद्यान से लाई गई बाघिन का कॉलर जुलाई 2009 से खराब है और पिछले कुछ दिनों से नया कॉलर लगाने के लिए बाघिन को खोजा जा रहा था, उसी क्रम में महावतों को बाघिन दो शावकों के साथ नजर आई।
महावतों के जरिए उद्यान के उपसंचालक विक्रम सिंह परिहार को खबर मिली तो उन्होंने वन्य प्राणी चिकित्सक डा. संजीव गुप्ता और भारतीय वन्य जीव संस्थान के डॉ. एम. रमेश के साथ सुबह नौ बजे लगभग 20 मिनट तक प्रत्यक्ष तौर पर बाघिन को शावकों के साथ देखा।
आधिकारिक तौर दी गई जानकारी में बताया गया है कि इन दोनों शावकों की उम्र दो से तीन माह है और सभी स्वस्थ्य हैं। शावकों की संख्या इससे ज्यादा होने की संभवना से इंकार नहीं किया जा रहा है।
मालूम हो कि देश के दूसरे सरिस्का के रूप में पहचान बना चुके पन्ना राष्ट्रीय उद्यान में बांधवगढ़ और कान्हा राष्ट्रीय उद्यान से दो बाघिनें लाई गई थीं। इन बाघिनों को क्रमश: (टी-एक) और (टी-दो) नाम दिया गया था। टी-एक पहले ही मां बन चुकी है और उसने चार शावकों को जन्म दिया था जिनमें से दो ही नजर आ रहे हैं। शेष की तलाश जारी है। अब टी-दो के मां बनने की पुष्टि हो गई है।
वन विभाग का दावा है कि दुनिया में यह पहली बार हुआ है, जब बाघ पुनस्र्थापना योजना में शत-प्रतिशत सफलता मिली है। वहीं दूसरी ओर टी-दो बाघिन का कॉलर खराब हो जाने और उसकी गतिविधियों का ठीक तरह से अनुश्रवण न हो पाने के बाद कई तरह की आशंकाएं जन्म लेने लगी थीं, मगर बाघिन के शावकों के साथ नजर आने पर आशंकाओं पर विराम लगा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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