चीन ने भारत के साथ प्रतिद्वंद्विता की बात खारिज की (लीड-1)
विदेश सचिव निरूपमा राव ने इस अवसर पर भारत-चीन के रिश्ते को 21वीं सदी का सबसे महत्वपूर्ण रिश्ता बताया। उन्होंने आपसी विश्वास पैदा करने की आवश्यकता पर सहमति जताई और द्विपक्षीय सम्बंधों के गतिशील और विकासशील प्रकृति को रेखांकित किया।
राव ने दोनों देशों से औद्योगिक और व्यापारिक समुदाय के बीच अधिक तालमेल और बातचीत का आह्वान करते हुए कहा, "स्वस्थ तरीके की प्रतिस्पर्धा के लिए हमारे पास अवसर हैं।"
भारत में चीनी राजदूत झांग यान ने बुधवार से शुरू हो रहे चीनी प्रधानमंत्री के तीन दिवसीय दौरे के लिए माहौल तैयार करते हुए यहां कहा, "भारत के उदय के बारे में चीन सकारात्मक दृष्टिकोण रखता है और भारत के उदय को वह एक अवसर के रूप में देखता है।"
यान ने उम्मीद जाहिर की कि चीनी प्रधानमंत्री का दौरा द्विपक्षीय सम्बंधों के विकास के लिए एक खाका तैयार करेगा।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्विपक्षीय रिश्ते को विस्तार देने के तरीके पर गुरुवार को वेन के साथ चर्चा करेंगे और जम्मू एवं कश्मीर के भारतीय नागरिकों को नत्थी किया हुआ वीजा जारी करने और दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापार घाटे के सम्बंध में नई दिल्ली की चिंताओं से अवगत कराएंगे।
यान ने कहा कि चीन और भारत अंतर्राष्ट्रीय भूमिकाएं तैयार करने में और वित्तीय संकट, जलवायु परिवर्तन, खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा सहित वैश्विक मुद्दों पर सहयोग करने में व्यापक रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
झांग यान ने कहा, "हमने बहुत कुछ हासिल किया है, लेकिन हम बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं। हमारे बीच कोई बुनियादी मतभेद व विवाद नहीं है।"
उन्होंने कहा, "मुझे विश्वास है कि दुनिया का कारखाना और दुनिया का कार्यालय एकसाथ काम करेगा। मुझे भरोसा है कि भारत और चीन एक साथ काम कर सकते हैं और एकसाथ समृद्ध हो सकते हैं।"
लेकिन यान ने यहीं पर चेतावनी भी दी कि दोनों देशों के बीच सम्बंध "नाजुक हैं और आसानी से क्षतिग्रस्त हो सकते हैं।" उन्होंने कहा, "चीन-भारत के रिश्ते बहुत नाजुक हैं और बहुत आसानी से क्षतिग्रस्त हो सकते हैं और उन्हें फिर से ठीक कर पाना बहुत कठिन होगा। इसलिए इसका विशेष देखभाल किए जाने की आवश्यकता है। इसके लिए सरकार को चाहिए कि वह वाकयुद्ध से बचने के लिए जनता को दिशानिर्देश दे।"
फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) द्वारा आयोजित विशेषज्ञों की एक गोलमेज बैठक में झांग यान ने कहा, "विश्वास के बगैर सच्चा रिश्ता नहीं बन सकता।"
राव ने रिश्ते को आगे ले जाने के लिए दोनों पक्षों को उन्नतिशील, कल्पनाशील और रचनात्मक होने का आह्वान किया और कहा, "आम जनता इस रिश्ते के केंद्र में है।"
यान ने भारी व्यापार घाटे को लेकर भारत की चिंताओं से सहमति जताई और भारत में चीनी बैंकों की स्थापना सहित अधिक व्यापार और निवेश पर जोर दिया। दोनों देशों के बीच इस समय 19.2 अरब डॉलर के व्यापार घाटे का अनुमान है।
झांग ने कहा, "चीन अन्य देशों के साथ किसी मकसद से व्यापार अधिशेष नहीं चाहता। लेकिन लम्बी अवधि के लिए बड़ा व्यापार घाटा अच्छा और तर्कसंगत नहीं है।"
फिक्की के महासचिव अमित मित्रा ने आईएएनएस को बताया, "व्यापार घाटा बहुत बड़ा है, इसके 19.2 अरब डॉलर तक होने का अनुमान है। यह कई सारे देशों के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) से अधिक है।"
झांग ने भारत से कहा कि घनिष्ठ रिश्ता बनाने के रास्ते में सीमा मुद्दे को आड़े न आने दिया जाए। उन्होंने व्यापार व निवेश के अवरोधों को दूर करने के लिए प्रभावी उपायों के साथ ही एक क्षेत्रीय मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की ओर बढ़ने की प्रक्रिया शुरू करने का आह्वान किया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications