भारत-चीन ठोस रिश्ते विकसित करने की ओर : जयशंकर
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार जयशंकर ने कहा, "इसे द्विपक्षीय सम्बंधों, क्षेत्रीय प्रश्नों और वैश्विक मुद्दों जैसे हमारे रिश्ते के विभिन्न पहलुओं में व्यक्त किया जा सकता है।"
जयशंकर ने कहा कि भारत को उम्मीद है कि चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ के मध्य दिसम्बर में होने वाले भारत दौरे से द्विपक्षीय सहयोग का स्तर ऊपर उठेगा।
वेन के 2005 में हुए भारत दौरे से सम्बंधों में सकारात्मक विकास हुआ था। उस समय भारत और चीन शांति व समृद्धि के लिए रणनीतिक व सहयोगात्मक साझेदारी विकसित करने के लिए सहमत हुए थे।
जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों ने कृषि और पर्यावरण से लेकर शहरीकरण एवं परिवहन के क्षेत्रों में बातचीत का एक रिकॉर्ड स्थापित किया था।
जयशंकर ने कहा, "यहां तक कि अपने मतभेदों पर भी, हमने दीर्घकालिक समाधान की कोशिश करते हुए कोई बात बिगड़ने नहीं दी।"
दोनों देशों के बीच प्रथम 10 महीनों के दौरान द्विपक्षीय व्यापार 49.8 अरब डॉलर पहुंच गया था और दोनों देशों को उम्मीद है कि 2010 तक 60 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा।
जयशंकर ने कहा, "द्विपक्षीय व्यापार में तीव्र बढ़ोतरी से जो बात वाकई में सामने आई है, वह यह कि भारतीय और चीनी अर्थव्यवस्था के बीच, विकास के वर्तमान स्तर पर एक स्वाभाविक सामंजस्य है।"
जयशंकर ने आगे कहा, "मुझे इसमें कोई संदेह नहीं कि हमने अभी तक व्यापार में जो वृद्धि देखी है, वह शुरुआती है।"
उन्होंने कहा कि भारत और चीन ने बीआरआईसी (ब्राजील, रूस, भारत, चीन) और जी-20 मंचों पर एक-दूसरे को सहयोग किया है, जो दोनों देशों के हितों के बीच सामंजस्य का एक अच्छा उदाहरण है।
राजदूत ने कहा, "बीआरआईसी और जी-20 बदलती दुनिया के संकेत हैं। भारत और चीन जैसे देशों के लिए वे वैश्विक नीति निर्धारण को प्रभावित करने और कुछ मामलों में उनकी प्रकृति में सुधार लाने के लिए एक मंच प्रदान करते हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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