अफजल गुरु की दया याचिका पर राष्ट्रपति के निर्णय का इंतजार : चिदम्बरम

नई दिल्ली, 13 दिसम्बर (आईएएनएस)। केंद्रीय गृह मंत्री पी.चिदम्बरम ने सोमवार को कहा कि संसद पर आतंकी हमले (2001) के दोषी अफजल गुरु की सजा पर कार्रवाई राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील द्वारा उसकी दया याचिका पर निर्णय दिए जाने के बाद ही की जा सकती है।

चिदम्बरम ने यहां संवाददाताओं से कहा, "मैंने कितनी बार यह बात बताई है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के दौरान राष्ट्रपति के पास दया याचिका के 14 मामले भेजे गए थे और उनमें से एक पर भी निर्णय नहीं आ पाया है। मेरे पूर्ववर्ती ने उन 14 मामलों के अलावा 14 और मामले भेजे थे, और उनमें से मात्र दो पर निर्णय लिया गया।"

चिदम्बरम ने कहा, "मेरे गृह मंत्री बनने के बाद राष्ट्रपति के अनुरोध पर सभी मामलों की समीक्षा की जा रही है और उन्हें बारी-बारी से फिर से भेजा जा रहा है।"

गृह मंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति पांच या छह मामलों पर पहले ही आदेश पारित कर चुकी हैं। उन्होंन कहा, "मैं समझता हूं कि हमें कुछ सिद्धांत और कुछ व्यवस्था का अनुसरण करना है। हर मामले को उसी क्रम में जमा किया जा रहा है, जिस क्रम में उन्हें पहले राष्ट्रपति के पास भेजा गया था। और मैं समझता हूं कि राष्ट्रपति पद के सम्मान के लिए जरूरी है कि हम स्वीकार करें कि मामले सौंपे जा चुके हैं.. और हम राष्ट्रपति के निर्णय का इंतजार करें।"

दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अफजल गुरु को दंडित किए जाने में देरी के लिए सोमवार को सरकार पर निशाना साधा।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने हमले के दौरान शहीद हुए नौ लोगों की स्मृति में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में कहा, "संसद पर हमले के लिए जिम्मेदार रहे लोगों के बारे में देश जानना चाहता है। सरकार को दोषियों को दंडित करना चाहिए।" शहीद हुए नौ व्यक्तियों में आठ सुरक्षाकर्मी शामिल थे।

स्वराज ने कहा कि हमलावरों को दोषी ठहराया जा चुका है और सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी सजा को मंजूरी भी दे दी है।

स्वराज ने कहा, "हम हमले के दौरान शहीद हुए लोगों को तो श्रद्धांजलि दे रहे हैं, जबकि दोषियों को अभी तक दंडित नहीं किया जा सका है। ऐसे में श्रद्धांजलि देना मात्र औपचारिकता जैसी लगती है।"

ज्ञात हो कि 13 दिसम्बर, 2001 को पांच बंदूकधारियों ने संसद पर हमला बोल दिया था और अंधाधुंध गोलीबारी की थी। उस हमले में नौ व्यक्ति मारे गए थे।

मारे गए लोगों में दिल्ली पुलिस के पांच जवान, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की एक महिला सुरक्षाकर्मी, संसद के दो सुरक्षाकर्मी और एक माली शामिल थे। हमले में एक पत्रकार भी घायल हो गया था, जिसकी बाद में मौत हो गई थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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