बाक़ी की सज़ा स्वदेश में

नारायण बारेठ
बीबीसी संवाददाता, जयपुर
ब्रिटिश नागरिक पैट्रिक बाक़ी की सज़ा स्वदेश में काटेंगे
भारत में मादक पदार्थ क़ानून के उल्लंघन में दस साल की सज़ा काट रहे ब्रिटिश नागरिक पैट्रिक मलूज़ो को अपनी बाक़ी की सज़ा ब्रिटेन में काटने की अनुमति मिल गई है.
पैट्रिक आधी सज़ा काट चुके हैं लेकिन उन्हें और उनके परिवारजनों को भारतीय जेल और व्यवस्था को लेकर शिकायत थी.
बंदियों के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाली संस्था 'फ़ेयर ट्रायल इंटरनेशनल' ने भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग की थी.
दोनों देशों के बीच कोई पांच साल तक चली सघन लिखा-पढ़ी के बाद पैट्रिक को राजस्थान की कोटा जेल से शनिवार को दिल्ली के लिए रवाना कर दिया गया.
पहले उन्हे तिहाड़ जेल में रखा जाएगा और बाद में ब्रिटेन भेज दिया जाएगा.
राजस्थान के जेल महानिदेशक ओमेंद्र भारद्वाज ने कहा, ''हां, पैट्रिक के प्रत्यर्पण के आदेश मिले हैं. उसी के तहत उसे कोटा जेल से दिल्ली भेजा गया है".
बेगुनाही का दावा
पैट्रिक का कहना था कि वो पर्यटक की तरह भारत आए थे लेकिन एक साज़िश के तहत उन्हे मादक पदार्थों की तस्करी के आरोप में फंसा दिया गया.
पुलिस ने उन्हें वर्ष 2004 में गिरफ़्तार किया था. फिर उन पर मुक़दमा चला और कोटा की एक अदालत ने 2006 में उन्हे दस साल की क़ैद और एक लाख रूपए के जुर्माने की सज़ा सुनाई.
पैट्रिक ने इस फ़ैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी लेकिन इस साल 23 फ़रवरी को हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फ़ैसले को बहाल रखते हुए पैट्रिक की अपील ख़ारिज कर दी.
पैट्रिक के वकील निशीथ दीक्षित के अनुसार इससे पैट्रिक बहुत व्यथित हुए.
उन्हे जुर्माने की राशि जमा कराना भी अनुचित लगा क्योंकि वो बराबर यही कहते रहे हैं कि वो बेगुनाह हैं.
उन्हे सलाह दी गई कि वो सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करें लेकिन उसमें समय लग सकता था.
इसलिए पैट्रिक और ब्रिटेन के ‘फ़ेयर ट्रायल इंटरनेशनल’ संगठन ने यही ठीक समझा कि उनकी तरफ़ से ये अपील की जाए कि उन्हे बाक़ी की सज़ा अपने मुल्क में काटने दी जाए.
जब पैट्रिक को कोटा की जेल से दिल्ली के लिए रवाना किया गया तो उनका चेहरा भाव-शून्य था और उन्होंने किसी सवाल का जवाब नहीं दिया.
बहराल पैट्रिक अब अपने वतन लौट रहे हैं हालांकि उन्हे वहां भी कुछ समय जेल में रहना पड़ेगा.


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