राज्यसभा चुनाव यानी विधायकों के खरीद-फरोख्त की मंडी : शिवराज (लीड-1)
चुनाव सुधार के लिए क्षेत्रीय विचार-विमर्श कार्यक्रम में सुझाव देते हुए चौहान ने राज्यसभा के अस्तित्व पर ही सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने कहा कि राज्यसभा को ऐसे लोगों के लिए बनाया गया था जो चुनाव नहीं लड़ सकते थे। मसलन, कलाकार व साहित्यकार इस अपर हाउस में पहुंचते थे। मगर आज इसकी क्या जरुरत है। अब तो ..जैसे लोग इस चुनाव में हिस्सेदारी निभाते हैं। यही कारण है कि यह चुनाव विधायकों के खरीद-फरोख्त की मंडी बन जाता है। इस स्थिति में ईमानदारी से राजनीति करने वालों का नुकसान होता है।
चौहान ने सुझाव दिया कि जिन लोगों का राज्यसभा के लिए मनोनीत किया जाना है, उनके लिए लोकसभा में स्थान आरक्षित कर दिए जाए। उन्होंने आगे कहा कि उद्योगपतियों के लिए चुनाव में पैसा लगाना इंवेस्टमेंट है और वे सिर्फ काला धन ही देते है। यही कारण है कि नीरा राडिया जैसे लोग जन्म लेते हैं। ऐसे लोगों को सत्ता के गलियारे से बाहर निकाला जाना चाहिए। चंदा का यह धंधा बंद होना चाहिए।
चैहान ने एक बार फिर राष्ट्रपति पद्घति से प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री का चुनाव कराने का सुझाव दिया। उन्होंने चुनावी खर्च को कम करने के लिए लोकसभा और विधानसभा के चुनाव साथ-साथ कराने की वकालत की और कहा कि यदि निर्वाचन आयोग से अनुमति मिले तो वह मध्य प्रदेश में मंडी व पंचायत तक के चुनाव लोकसभा तथा विधानसभा के साथ-साथ कराने को तैयार हैं।
चौहान ने यह सुझाव भी दिया कि कोई व्यक्ति यदि एक बार विधानसभा का चुनाव जीत जाता है तो उसे अपने कार्यकाल को पूरा करने का समय मिलना चाहिए अर्थात पांच साल तक वह अपने पद पर बने रहना चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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