चुनाव प्रचार 48 घंटे पहले बंद हो : कुरैशी
केंद्रीय विधि विभाग और निर्वाचन आयोग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित चुनाव सुधार पर क्षेत्रीय विचार-विमर्श कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए रविवार को कुरैशी ने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में 60 वर्ष बाद भी चुनाव में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने के लिए काफी कुछ किया जाना बाकी है। इसीलिए राज्य स्तर पर सात और राष्ट्रीय स्तर पर एक विचार विमर्श संगोष्ठि करने का निर्णय लिया गया है। इस अभियान की शुरुआत भोपाल से की गई है।
कुरैशी ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में सुधार लाने के लिए जरुरी है कि प्रचार के सभी तरीकों पर 48 घंटे पहले बंदिश लगा दी जाए। इतना ही नहीं जिम्मेदार अधिकारियों के तबादलों की प्रक्रिया चुनाव से छह माह पहले बंद कर देना चाहिए। साथ ही चुनाव के दौरान अच्छा काम करने वाले अधिकारियों को एक साल तक संरक्षण मिलना चाहिए क्योंकि सत्तारुढ़ दल सबसे पहले इन अधिकारियों को परेशान करते हैं।
राजनीति में अपराधियों के बढ़ती संख्या पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि तमाम राजनीतिक दलों में 30 से 40 प्रतिशत लोग यह अवसर पा जाते हैं। ऐसे लोगों पर रोक लगनी चाहिए, जो अपहरण, हत्या, डकैती और बलात्कार जैसे अपराधों में शामिल हैं। राजनीति में बढ़ते अपराधीकरण को रोकने के लिए राजनीतिक दलों को पहल करनी होगी।
कुरैशी ने माना कि निर्वाचन आयोग के पास कोई जादू की छड़ी नहीं है, फिर भी बिहार में धन बल के इस्तेमाल पर नजर रखने के लिए प्रकोष्ठ बनाया गया था, जिसके अच्छे नतीजे भी मिले हैं। निर्वाचन आयेाग पांच अन्य राज्यों में होने वाले चुनाव में भी इस प्रकोष्ठ का इस्तेमाल करेगा।
चुनाव आयोग राजनीतिक दलों पर कार्रवाई करने में भी अपने को असहाय पाता है। कुरैशी का कहना है कि कुल 1100 राजनीतिक दल पंजीकृत हैं, जिनमें सिर्फ 300 दल ही सक्रिय हैं। आयेाग दल का पंजीयन तो कर सकता है मगर निरस्त (डी रजिस्टर) नहीं कर सकता।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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