हीरे से परे व्यापार करेंगे भारत और बेल्जियम
प्रधानमंत्री के विशेष विमान से, 12 दिसम्बर (आईएएनएस)। हीरे पर मौजूदा वर्चस्व से परे भारत और बेल्जियम अपने व्यापारिक रिश्तों में विविधता लाने को इच्छुक हैं, खासतौर से सूचना प्रौद्योगिकी, ऊर्जा एवं ढांचागत विकास जैसे क्षेत्र में।
विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) विवेक काटजू ने कहा, "प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उनके बेल्जियम समकक्ष येव्स लेटरमी द्विपक्षीय व्यापार में विविधता लाना चाहते हैं।"
मनमोहन सिंह की दो यूरोपीय देशों की यात्रा की समाप्ति के बाद स्वदेश लौटते समय विशेष विमान में काटजू ने संवाददाताओं से बातचीत की। इससे पहले, प्रधानमंत्री ने भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में भाग लिया तथा बेल्जियम और जर्मनी में नेताओं से द्विपक्षीय वार्ता की।
काटजू ने कहा कि भारत चाहता है कि बेल्जियम की कम्पनियां भारत के महत्वाकांक्षी ढांचागत विकास कार्यक्रम में निवेश करें।
काटजू ने सरकार की अगली पंचवर्षीय योजना के दौरान ढांचागत विकास पर 500 अरब डॉलर खर्च करने की नीति का हवाला देते हुए कहा, "बेल्जियम और भारत के बढ़ते रिश्ते के चलते ढांचा तैयार करने की भारत की महत्वाकांक्षी योजना में निवेश का अवसर आया है।
उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह और लेटरमी के बीच हुई वार्ता के दौरान गैर पारंपरिक ऊर्जा स्रोत, शिक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी एवं रत्न तथा आभूषण जैसे मामलों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।
यूरोपीय संघ में बेल्जियम भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच व्यापार 7.5 अरब यूरो तक पहुंच गया है। लेकिन द्विपक्षीय आभूषण व्यापार के 75 फीसदी पर हीरे का वर्चस्व है।
बेल्जियम के राजदूत जीन एम. डिबॉट के अनुसार बेल्जियम में 40 फीसदी रत्न और आभूषण भारत से आयात किया जाता है। इस यूरोपीय देश में रत्न और आभूषण के व्यापार से जुड़े 70 से 80 फीसदी भारतीय रह रहे हैं। भारत, बेल्जियम को निर्यात करने वाला 13वां सबसे बड़ा निर्यातक है तथा बेल्जियम का नौवां सबसे बड़ा आयातक है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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