कनाडाई महिला ने तलाशी भारत में अपनी जड़ें
नई दिल्ली, 12 दिसम्बर (आईएएनएस)। शोभा रे नामक कनाडाई महिला दो उद्देश्यों से इन दिनों भारत में हैं और उन्होंने अपने दोनों उद्देश्यों को पूरा कर लिया है। एक तो उन्होंने यहां योग का प्रशिक्षण लिया और दूसरा अपने बिछुड़े भारतीय रिश्तेदारों को ढूढ़ निकाला। रे ने आज के चार वर्ष पहले अपने भारतीय रिश्तेदारों की तलाश शुरू की थी।
दरअसल, शोभा के दादा भैरों रे 1890 के दशक में फिजी चले गए थे। शोभा फिजी में ही पैदा हुईं थीं, लेकिन 1970 के दशक में उनका परिवार कनाडा चला गया था। शोभा को इतना पता है कि रे परिवार के रिश्तेदार भारत में थे। उनके पिता राजेंद्र रे ने लगभग 20 वर्ष पहले उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में स्थित अपने पैतृक गांव बैजूधिया का दौरा किया था और अपने बच्चों से अपनी उस यात्रा के बारे में बताया था।
लेकिन उन दिनों भारत के बारे में सोचना बहुत दूर की बात थी, और शोभा और उनके भाई-बहन ने पिता की बातें सुनी और फिर उसे भूल गए। वर्ष 2004 में शोभा ने अपनी भारतीय जड़ों के बारे में सोचना शुरू किया। न्यूजीलैंड में जा बसे फिजी के राजेंद्र प्रसाद की एक किताब पढ़ने और उनका व्याख्यान सुनने के बाद शोभा के मन में अपनी भारतीय जड़ों के बारे में जिज्ञासा जागी।
शोभा ने कहा, "हमें फिजी में भारतीय समुदाय के बारे में कभी नहीं बताया गया था। स्कूल में हमने ब्रिटिश इतिहास, यूरोपीय इतिहास, प्राचीन इतिहास पढ़ा था, लेकिन हमें गिरमिटिया प्रणाली के बारे में कभी नहीं बताया गया था और यह भी नहीं कि भारतीय कैसे फिजी पहुंचे थे। मैंने अपने परिवारिक इतिहास के बारे में अधिक जानकारी हासिल करने के लिए संकल्प लिया।"
शोभा ने अपने पारिवारिक इतिहास के बारे में जानने के लिए अपने चचेरे भाई-बहनों और अन्य रिश्तेदारों से सम्पर्क किया। अंत में न्यूजीलैंड निवासी उनकी एक चचेरी बहन निर्मला ने बताया कि राजेंद्र रे द्वारा भारत दौरे के बाद दी गई कुछ जानकारी उन्होंने लिख रखी है।
इस जानकारी में गोरखपुर का एक फोन नम्बर था। शोभा ने बड़ी उत्सुकता के साथ उस नम्बर पर डायल किया। लेकिन पता चला कि राम नरेश राय अब उस घर में नहीं रहते, कही अन्यत्र चले गए हैं। इसके साथ ही शोभा की तलाश एक धुधले मोड़ पर रुक गई।
शोभा ने बाद में कनाडा में एक सामाजिक संगठन से सम्पर्क किया। उस संगठन ने उन्हें भारत में उनके पैतृक गांव की तलाश के लिए एक व्यक्ति मुहैया कराने में मदद की। उस व्यक्ति ने बैजूधिया गांव का पता लगाने के बाद गोरखपुर में एक अन्य रिश्तेदार बनवारी राय का पता शोभा को भेजा।
शोभा ने बनवारी राय को हिंदी में एक पत्र लिखा और बनवारी राय ने जवाब में उन्हें भारत आने का निमंत्रण दिया। उसके बाद उन्होंने भारत दौरे की योजना बनानी शुरू की और योग प्रशिक्षण लेने के लिए एक महीने की छुट्टी लेने का निश्चय किया। शोभा ने ऋषिकेश में एक महीने के योग प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लिया और उसके बाद वह गोरखपुर गईं।
शोभा वैंकूवर शहर में सूचना की आजादी विभाग में प्रशासक हैं।
बैजूधिया गांव में शोभा ने बड़ी संख्या में अपने रिश्तेदारों से मुलाकात की। लेकिन शिवमूर्ति राय से मिलकर वह सबसे अधिक प्रभावित हुईं। वह उनके पिता के पहले चचेरे भाई हैं। यानी उनके दादा के छोटे भाई के बेटे।
शोभा ने आईएएनएस को बताया, "मैं अपने दादा के भतीजे से मिल कर भावविभोर थी। मैं उनके बारे में कुछ नहीं जानती थी। वह मेरे पिता के पहले चचेरे भाई हैं। यह एक भावुक मिलन था। मैं उनसे मिलकर इसलिए अधिक भावुक हो गई थी, क्योंकि मैंने महसूस किया कि मेरे पास अभी भी एक पिता तुल्य व्यक्ति जीवित है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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