'सस्ती भारतीय दवाओं को न रोकें'

लोगों को आपातकालीन सहायता देने वाले वैश्विक स्वयंसेवी संगठन- मेडिसीन्स सैन्स फ्रंटियर्स (एमएसएफ) ने 11वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन के शुभारंभ से पहले एक बयान में मांग की कि "यूरोपीय संघ जीवन रक्षक दवाओंे के उत्पादक के रूप में भारत की भूमिका के अवमूल्यन का प्रयास बंद करे।"

बयान में कहा गया है कि भारत में बनने वाली एड्स की 80 प्रतिशत दवाओं का उपयोग समूचे विकासशील विश्व में होता है, जिससे 50 लाख से अधिक लोगों का उपचार होता है।

भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए संधिक्रम के हिस्से के तौर पर यूरोपीय संघ ने कुछ प्रावधान तय कर रखे हैं, ताकि स्पर्धा को सीमित किया जा सके। खासतौर से 'विशिष्ट आंकड़ा' जो एक पेटेंट की तरह कार्य कर सकता है और वर्गीय दवाओं पर 10 वर्ष तक के लिए रोक लगा सकता है।

बयान में कहा गया है, "चेतावनी है कि भारतीय कानून के तहत विशिष्ट आंकड़ा उन्हीं उत्पादों पर लागू होगा जो पहले स्थान में पेटेंट के योग्य नहीं होंगे। इससे नवनिर्धारित-खुराक के संगत तत्वों का विकास रुक जाएगा, क्योंकि कई दवाओं के संगत तत्व एक ही गोली में होते हैं। इनका हालांकि भारत में पेटेंट नहीं हो सकता है।"

बसेल्स शिखर सम्मेलन मेंदोनों पक्ष बृहत व्यापार की नीति बना रहे हैं और निवेश का सौदा तय कर रहे हैं। उम्मीद है कि इससे उनके बीच व्यापार कई गुना बढ़ेगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+